शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

खारे पानी में ....


















कभी देखना हो
वक्‍त का सितम,
मेरी खामोशी को देख लेना ...

म़रहम़  प्‍यार का
मेरे दर्द को
जाने क्‍यूं खारे पानी में
तब्‍दील कर देता है ...

उसका बड़प्‍पन है ये तो
जो मेरे गु़नाहों को भी
हक़ का ओह़दा देता है ...

आईना पढ़ लेता है
मेरी आंखों में तुमको
इसलिए जाने कब से
देखा नहीं उसे ...

रूठकर गए थे तुम
इक बार तो
ये सोचा होता
मुझको मनाना नहीं आता ....

मुहब्‍बत लफ़्ज
बे़मानी हो जाएगा
जो तुमने
मुझ पे ए़तबार न किया ....

35 टिप्‍पणियां:

  1. आईना पढ़ लेता है
    मेरी आंखों में तुमको
    इसलिए जाने कब से
    देखा नहीं उसे ...

    रूठकर गए थे तुम
    इक बार तो
    ये सोचा होता
    मुझको मनाना नहीं आता ....
    Antarman ko chhoo lenewalee panktiyan! Bahut hee sundar rachana hai!

    उत्तर देंहटाएं
  2. मुहब्‍बत लफ़्ज
    बे़मानी हो जाएगा
    जो तुमने
    मुझ पे ए़तबार न किया ....
    - क्या बात है वाह बहुत सही लिखा है दीदी आप ने......दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती

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  3. बहुत सुंदर पोस्ट,....अच्छी रचना,....

    नई रचना के लिए काव्यान्जलिमे click करे

    उत्तर देंहटाएं
  4. रूठकर गए थे तुम
    इक बार तो
    ये सोचा होता
    मुझको मनाना नहीं आता...
    वाह सदा जी..
    बहुत सुन्दर.

    उत्तर देंहटाएं
  5. म़रहम़ प्‍यार का
    मेरे दर्द को
    जाने क्‍यूं खारे पानी में
    तब्‍दील कर देता है ...

    बहुत खूबसूरत |

    उत्तर देंहटाएं
  6. कभी देखना हो
    वक्‍त का सितम,
    मेरी खामोशी को देख लेना

    ह्रदय को छूती हुयी रचना

    उत्तर देंहटाएं
  7. मुहब्‍बत लफ़्ज
    बे़मानी हो जाएगा
    जो तुमने
    मुझ पे ए़तबार न किया .

    प्यार में ऐतबार बहुत ज़रूरी है.

    उत्तर देंहटाएं
  8. आईना पढ़ लेता है
    मेरी आंखों में तुमको
    इसलिए जाने कब से
    देखा नहीं उसे ...

    ...बहुत ख़ूबसूरत भावाभिव्यक्ति...

    उत्तर देंहटाएं
  9. कभी देखना हो
    वक्‍त का सितम,
    मेरी खामोशी को देख लेना ...

    एक कहानी कह दी आपने...इन चार शब्दों में...

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  10. सदा जी...

    शब्दों से बांदने में तो आप सिद्धस्त हैं....
    नहीं मना पाएंगी उसको...
    कभी न ऐसा रूठा होता...
    दर्द न होता ऐसा उसको...

    वो तो भ्रम में जलता होगा...
    तिल तिल रोज़ सुलगता होगा...
    राख हुए मन में भी तुझको..
    देख रोज़ ही मरता होगा...
    वाह....

    दीपक शुक्ल...

    उत्तर देंहटाएं
  11. मुहब्‍बत लफ़्ज
    बे़मानी हो जाएगा
    जो तुमने
    मुझ पे ए़तबार न किया .... bahut sunder panktiya .....

    उत्तर देंहटाएं
  12. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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  13. कोमल भावो की बेहतरीन अभिवयक्ति.....

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत ही खूबसूरत....बेहतरीन अभिवयक्ति.....

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  15. ख़ूबसूरत प्रस्तुति,सादर.

    मेरे ब्लॉग पर भी पधार कर अनुगृहीत करें.

    उत्तर देंहटाएं
  16. बात बाहर की हो,तो अविश्वास और भीतर की हो,तो विश्वास का सहारा ही सम्यक्।

    उत्तर देंहटाएं
  17. म़रहम़ प्‍यार का
    मेरे दर्द को
    जाने क्‍यूं खारे पानी में
    तब्‍दील कर देता है ...

    बहुत खूबसूरती से लिखा है ... बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  18. म़रहम़ प्‍यार का
    मेरे दर्द को
    जाने क्‍यूं खारे पानी में
    तब्‍दील कर देता है ..

    और ये खारा पानी उनकी मुहब्बत के मरहम से ही तो निकलता है ... फिर न एतबारी उल्हाना क्यों ...

    उत्तर देंहटाएं
  19. सुंदर अभिव्यक्ति की बहुत अच्छी रचना,...बेहतरीन पोस्ट...

    मेरे नए पोस्ट के लिए--"काव्यान्जलि"--"बेटी और पेड़"--में click करे

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  20. बहुत खूबसूरती से लिखा ...बहुत खूब ...

    उत्तर देंहटाएं
  21. man ki vyatha...

    आईना पढ़ लेता है
    मेरी आंखों में तुमको
    इसलिए जाने कब से
    देखा नहीं उसे ...

    bahut sundar rachna, badhai.

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....