बुधवार, 21 दिसंबर 2011

रूह आ़हत सी ... !!!













बेड़ियां पैरों में हों तो,
तकलीफ होती है
चलने में  ...
गर ख्‍़यालों में
लगानी पड़े जब बेड़ियां
जिंदगी मायूस हो जाती है
कै़द में रहकर
ग़ुनाह का अहसास मन को
कचोटता है ...
अपनी ही धड़कन के स्‍व़र
कुरेदते हैं जख्‍़मों को
आह होठों को छूकर धीमे से
सिसकी में बदलती है जब
रूह आ़हत सी 
जाने किस चाहत की
सज़ा पाती है
नज़र झुकाओ जब भी बस वो
सज़दे में दिखती है ...
दुआओं पे जब
हर इक लम्‍हा बसर होता है
ख़ुद पे अपनी ही
सांसो का क़हर होता है ...
सज़ा का तलबग़ार मन
तेरे सुकू़न की खा़तिर
हर जु़र्म का
इस्‍तेक़बाल करता है ...
ये कहते हुए ..
गर ख्‍़यालों में
लगानी पड़े जब बेड़ियां तो
जिंदगी मायूस हो जाती है
वहां हंसी खामोशी हो जाती है .....!!!

27 टिप्‍पणियां:

  1. अन्तःस्थिति को दर्शाती एक अच्छी रचना

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  2. क्या कहने, बहुत सुंदर रचना
    कविता का भाव और प्रस्तुतिकरण बेजोड़

    बेड़ियां पैरों में हों तो,
    तकलीफ होती है
    चलने में ...
    गर ख्‍़यालों में
    लगानी पड़े जब बेड़ियां
    जिंदगी मायूस हो जाती है

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेमिसाल..
    बेहद सुन्दर रचना..

    "सज़ा का तलबग़ार मन
    तेरे सुकू़न की खा़तिर
    हर जु़र्म का
    इस्‍तेक़बाल करता है ...
    बहुत खूब ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. गर ख्‍़यालों में
    लगानी पड़े जब बेड़ियां
    जिंदगी मायूस हो जाती है

    सच को कहती अच्छी प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  5. गर ख्‍़यालों में
    लगानी पड़े जब बेड़ियां तो
    जिंदगी मायूस हो जाती है
    वहां हंसी खामोशी हो जाती है ...!!!
    .....जीवन का सन्देश देती है आपकी रचना

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत अच्छी कविता दी ! बहुत कुछ दिया सोचने के लिये।

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  7. ये कहते हुए ..
    गर ख्‍़यालों में
    लगानी पड़े जब बेड़ियां तो
    जिंदगी मायूस हो जाती है
    वहां हंसी खामोशी हो जाती है .....!!

    अध्यात्म और यथार्थ दोनो का बोध कराती सुन्दर रचना।

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  8. बेड़ियाँ तो सदा कष्टकारी होती हैं।

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  9. बेड़ियां पैरों में हों तो,
    तकलीफ होती है
    चलने में ...
    गर ख्‍़यालों में
    लगानी पड़े जब बेड़ियां
    जिंदगी मायूस हो जाती है
    Kya baat kahee aapne! Bahut sashakt rachana!

    उत्तर देंहटाएं
  10. बेडियाँ पैरों में हो तो तकलीफ होती है चलने में,..सुंदर पन्तियाँ,
    भावो का खुबशुरत अहसाश,...

    मेरे नये पोस्ट लिए काव्यान्जलि..: महत्व .. में click करे

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  11. वाह...कमाल की नज़्म कही है आपने...बधाई

    नीरज

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  12. खुबसूरत एहसासों के साथ ही बेहतरीन रचना .....

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  13. बेहद खूबसूरत शब्दों से सजी रचना

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  14. गर ख्‍़यालों में
    लगानी पड़े जब बेड़ियां
    जिंदगी मायूस हो जाती है

    Bahut Sunder

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  15. बेहतरीन सीख है इस रचना में।

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  16. ख्यालों पर जब हो बेड़ियाँ तो ख़ुशी को खामोश होना होता ही है !
    मार्मिक !

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  17. सुंदर रचना !
    खूबसूरत शब्दों के साथ बेहतरीन रचना ...
    आभार !!

    मेरी नई रचना ख्वाबों में चले आओ

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  18. मन की अंतर्व्यथा को शब्द देती ...सुन्दर रचना

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  19. ग़ुनाह का अहसास मन को
    कचोटता है ...
    अपनी ही धड़कन के स्‍व़र
    कुरेदते हैं जख्‍़मों को
    आह होठों को छूकर धीमे से
    सिसकी में बदलती है जब
    रूह आ़हत सी
    जाने किस चाहत की
    सज़ा पाती है
    जीवन की सच्चाई को ब्यान करती बहुत ही समवेदन शील प्रस्तुति दिल चूलीय आपकी इस रचना ने आभार

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....