बुधवार, 7 दिसंबर 2011

सूखे रूमाल के बीच ....!!!

मुझे कुछ खरीददारी करनी है
कुछ की कीमत पता करनी है
सोचती हूं सबसे पहले
दोस्‍ती की कीमत का पता करूं
फिर उसके साथ
वफा का सौदा कर लूगी ...!
दूर है ठिकाना
अपनो का आओ
एक रिश्‍ता बना लेती हूं नया
उसके साथ चलूंगी
उसी तरह
जिस तरह वो चलेगा मेरे साथ
कोई शर्मिन्‍दगी नहीं होगी
आपस में सारी शर्तें
पहले ही तय कर लेंगे हम
वो मेरे बुरे वक्‍त में साथ होगा
तो मैं उसके बुरे वक्‍त में
दौड़ के पहुंच जाऊंगी उसके पास
खुशी के मौके पर
उसके बुलाने की प्रतीक्षा नहीं करूंगी फिर
लेकिन अभिमान को छोड़ना होगा
उसी दुकान पर तभी तो
मुस्‍कान के बदले हंसी दे सकूंगी
किसी बेगाने को
आंसुओ को सूखने के लिए
छोड़ दिया है जिद करके
सूखे रूमाल के बीच...!!
एक तह लगाकर रख लिया है
मुट्ठी में उसी तरह
जैसे मन को कड़ा करके
तोड़ता है गुलों को गुलशन से माली
देव प्रतिमा पे  चढ़ाने के लिए .... !!!

43 टिप्‍पणियां:

  1. लेकिन अभिमान को छोड़ना होगा
    उसी दुकान पर तभी तो
    मुस्‍कान के बदले हंसी दे सकूंगी
    किसी बेगाने को
    आंसुओ को सूखने के लिए
    छोड़ दिया है जिद करके
    सूखे रूमाल के बीच...!!

    बहुत सुंदर ....

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  2. बहुत बढ़िया ! दिल से लिखी है !

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  3. मुट्ठी के बीच सूखे रुमाल में आंसुओं को रखना ..गज़ब की अभिव्यक्ति

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  4. तब तो उस दूकान से बेशकीमती खरीदारी की जा सकती है खुद को बेच कर ..बहुत ही प्यारी रचना .

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  5. वाह दीदी वाह ....गज़ब के भाव और गज़ब की प्रस्तुति......आभार इस प्रस्तुति के लिए

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  6. Itnee gahrayee hai is rachana me ki samajh me nahee aa raha kya kahun...alfaaz mil nahee rahe...

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  7. अभिमान तो छोड़ना ही होगा, तभी मान मिलेगा।

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  8. जिसके पास इन सबकी दुकान हो, वही बता पायेगा इनकी कीमत।

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  9. मुझे कुछ खरीददारी करनी है
    कुछ की कीमत पता करनी है
    सोचती हूं सबसे पहले
    दोस्‍ती की कीमत का पता करूं
    फिर उसके साथ
    वफा का सौदा कर लूगी ...!
    dosti kee is kimat me mann ka bikhraw hai , bahut achhe se likha hai

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  10. क्या बात है सदा जी आपने तो मन छू लिया... बहुत ही शानदार,बेहतरीन और क्या कहूँ शब्द ही नहीं मिल रहे हैं लाजवाब प्रस्तुति आज आपको आपने दो लिंक्स send कर रही हूँ हो सके और यदि आपको समय मिले कभी तो ज़रूर आयेगा मेरे दूसरे ब्लॉग पर भी
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  11. बहुत सुंदर भाव की रचना

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  12. बहुत प्यारी मासूम सी अभिव्यक्ति .......

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  13. जिस दिन दोस्ती की कीमत पता करेंगी ... उसी दिन दोस्ती खत्म हो जायगी ... अच्छी रचना है बहुत ...

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  14. गजब के भावों की बेहतरीन प्रस्तुति सुंदर पोस्ट.....

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  15. बहुत अच्छी रचना के लिए बधाई |
    आशा

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  16. उसके बुलाने की प्रतीक्षा नहीं करूंगी फिर
    लेकिन अभिमान को छोड़ना होगा ...bahut sunder line...waah !

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  17. "दोस्‍ती की कीमत का पता करूं
    फिर उसके साथ
    वफा का सौदा कर लूगी ...!"
    इन पंक्तियों ने सामाजिकता की पूरी कथा कह दी है. वाह!

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  18. शर्त बीच में आई कि प्रेम गया समझिए..........

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  19. वाह बेहतरीन सौदेबाजी...
    शुभकामनाएं

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  20. गहरे भाव.....

    सुंदर प्रस्‍तुति।

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  21. "दोस्‍ती की कीमत का पता करूं
    फिर उसके साथ
    वफा का सौदा कर लूगी ...! बहुत गहरे भाव है.....

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  22. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-722:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  23. लेकिन दोस्ती की और रिश्तों की नतो कोई कीमत होती है
    और न ही कोई शर्त ..बस अभिमान को छोड़ने से ही बात बन जायेगी

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  24. आंसुओ को सूखने के लिए
    छोड़ दिया है जिद करके
    सूखे रूमाल के बीच...!!
    एक तह लगाकर रख लिया है
    मुट्ठी में उसी तरह
    जैसे मन को कड़ा करके
    तोड़ता है गुलों को गुलशन से माली
    देव प्रतिमा पे चढ़ाने के लिए .... !!!
    आह ।

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  25. मुझे कुछ खरीददारी करनी है
    कुछ की कीमत पता करनी है
    सोचती हूं सबसे पहले
    दोस्‍ती की कीमत का पता करूं
    फिर उसके साथ
    वफा का सौदा कर लूगी ...!सुन्दर शब्दावली, सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  26. कई समीकरणों को छूती सुन्दर रचना!

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  27. ये कुछ ऐसे विचार हैं, जिनसे सहमत होने को जी चाहता है।

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  28. गहरे भावों का सुंदर अहसास कराती रचना,....
    मेरे पोस्ट में आपका इंतजार है,....

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  29. आंसुओ को सूखने के लिए
    छोड़ दिया है जिद करके
    सूखे रूमाल के बीच...!!
    एक तह लगाकर रख लिया है
    मुट्ठी में उसी तरह
    जैसे मन को कड़ा करके
    तोड़ता है गुलों को गुलशन से माली
    देव प्रतिमा पे चढ़ाने के लिए .... !!!

    बहुत ही अद्भुत एवं अनमोल रचना सदा जी ! बहुत ही खूबसूरत ! हर शब्द सीधे दिल में उतरता चला जाता है ! बधाई स्वीकार करें !

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  30. आदरणीय दीदी,
    प्रथम करें अभिवादन स्वीकृत, वफा दोस्ती की क्या कीमत।
    हँसी के बदले दे मुस्कान, मिले न ऐसी मुझे दुकान।।
    चयन बहुत शब्दों का सुन्दर, भावों का भर दिया समुन्दर।
    दिल से प्रेषित करूँ बधाई, रचना मुझे बहुत ही भाई।।

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  31. behtreen prastuti, aapsa dost aapsi vfa kon n sath hoga aapke...........

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....