शनिवार, 18 जून 2011

आशीषों तक पापा ....












यादों
की गलियों में लम्‍हा - लम्‍हा मेरा
जाता है बस आपकी आशीषों तक पापा ।

मैं बड़ी होकर भी तो नहीं बड़ी हुई कभी,
आपकी नजरों में रही हूं छोटी सदा पापा ।

मां की डांट से बचाते चुपके से समझाते,
मेरे लिये हंस के बहलाते मां को जब पापा ।

बचपन के दिन वो बचपन की बातें बताओ,
हम चाहकर भी क्‍यूं नहीं भुला पाते पापा ।

मैं भूली हूं न भूलूंगी कभी जिन्‍दगी मेरी तो,
आपके स्‍नेह की उंगली थाम के चली है पापा ।

मुस्‍कराहट आपकी निशानियां वो गुडियों की,
आज भी कैद हैं वो मेरी छोटी संदूक में पापा ।

मन मचल जाता है किसी बच्‍चे की तरह अब भी,
दहलीज़ पे जब कभी आकर बेटा कहते हो पापा ।

लिखी है हर याद आपके नाम बच्‍चों सी वो बातें,
जानती हूं पढ़कर होंगे आज भी मुस्‍कराते पापा ।

31 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही कोमल भावनाओं में रची-बसी खूबसूरत रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।

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  2. बहुत खूब
    सच है जब तक माँ बाप है हम बच्चे ही रहेंगे

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  3. पापा को बहुत प्यारी भेंट दी है ..कोमल एहसास से बुनी सुन्दर रचना

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  4. कोमल भावनाओं में रची-बसी सुन्दर रचना|

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  5. लाजवाब...प्रशंशा के लिए उपयुक्त कद्दावर शब्द कहीं से मिल गए तो दुबारा आता हूँ...अभी
    मेरी डिक्शनरी के सारे शब्द तो बौने लग रहे हैं...

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  6. आपकी पुरानी नयी यादें यहाँ भी हैं .......कल ज़रा गौर फरमाइए
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.com/

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  7. मां की डांट से बचाते चुपके से समझाते,
    मेरे लिये हंस के बहलाते मां को जब पापा ।
    ye to shayad sab bachchon ke samne hota hai.sundar prastuti.

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  8. man ke komal bhavo se ujaagar hui ye kavita
    natmastak hone ka dil chahta hai........behad khub surat abhivyakti....aabhar

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  9. मैं भूली हूं न भूलूंगी कभी जिन्‍दगी मेरी तो,
    आपके स्‍नेह की उंगली थाम के चली है पापा

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  10. उम्दा प्रस्तुति सदा जी ।

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  11. मर्मस्पर्शी रचना. बहुत बढ़िया.

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  12. यादों कि गलियों में लम्हा लम्हा.....

    मीठी मीठी यादों में लिपटी सुंदर कबिता.

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  13. पापा की याद समेटे सुंदर एह्सास

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  14. फादर्ज़ डे पर पापा को दिया गया नायाब तोहफ़ा. बेटियाँ ही ऐसे तोहफ़े तैयार रखती हैं. बहुत सुंदर कविता है.

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  15. भावुक कर गयी आपकी ये रचना ... पिता के लिए बच्चे हमेशा बच्चे ही रहते हैं ...

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  16. बहुत बढ़िया लिखा है आपने
    ----------------------------------
    कल 21/06/2011को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की गयी है-
    आपके विचारों का स्वागत है .
    धन्यवाद
    नयी-पुरानी हलचल

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  17. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति बधाई

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  18. कोमल एहसास से बुनी सुन्दर रचना

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  19. पिता को समर्पित बहुत सुंदर कविता

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  20. सुन्दर, भावपूर्ण, ह्रदयस्पर्शी रचना....
    पिता का प्यार ....आकाश का विस्तार

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  21. सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ शानदार रचना लिखा है आपने! बेहतरीन प्रस्तुती!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  22. मैं जन्नतों कि गली रस्ते चूम लेता हूँ,
    शराब प्यार कि पीकर के झूम लेता हूँ,
    मैं अपने माता-पिता कि लगा के एक चक्कर
    तमाम विश्व को पल भर में घूम लेता हूँ.

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....