बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

कुछ टूटता है ...







(1)

इक अश्‍क की बूंद,

फिसलकर

तेरे गालों पे जब बही थी

बहते-बहते

जाने कब वो जाकर

समन्‍दर में मिल गई थी ।

(2)

रूसवाईयों को छोड़कर

जब भी

वो गया था

घर की दहलीज

बड़ी देर सिसकती रही ।

(3)

जब भी कुछ टूटता है,

वह बिखर ही

क्‍यों जाता है

चाहे वह कांच का

कोई पात्र हो

या मिट्टी का खिलौना ...!!

36 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी क्षणिकाएं हैं. बधाई!

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  2. सारी क्षणिकाएॅ सुंदर है पर दुसरा वाला बेहतरीन है।

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  3. वाह...बेजोड़ रचना....बधाई स्वीकारें...

    नीरज

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  4. आदरणीय सदा जी..
    नमस्कार
    सारी क्षणिकाए बेहतरीन है।

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  5. Teeno rachanayen nihayat achhee hain...khaas kar doosaree ne to ni:shabd kar diya!

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  6. सभी क्षणिकायें बहुत सुन्दर..

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  7. जब भी लौटी हैं तेरी आहटें मेरी दहलीज़ से
    मेरी उम्मीदों की खिड़कियाँ बहुत देर तक रोती रहीं ......

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  8. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (24-2-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  9. तीनों क्षणिकाएं संक्षिप्त मगर सारगर्भित बिलकुल वैसे ही जैसे गागर .

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  10. तीनो रचनाएँ अच्छी लगी.
    खासकर दूसरी तो लाजवाब.
    सलाम

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  11. टूटने वाला बिखरता है। सुन्दर कविता।

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  12. सुन्दर अभिव्यक्ति!
    सभी क्षणिकाएँ बहुत शानदार हैं!

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  13. एक ही भाव के तीन बेहतरीन रंग, असर कर गए।

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  14. जब भी कुछ टूटता है

    वह बिखर ही

    क्यों जाता है ....'

    बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति ...तीनों रचनाएँ लाजवाब

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  15. बहुत ही कोमल और भावपूर्ण क्षणिकायें ! मन को गहराई तक आंदोलित कर गयीं ! अति सुन्दर !

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  16. bikhrne se pata chalta hai ki toot gaya hai kuchh ! bahut achche achche bhav teeno rachnaon main !! bahut sunder!!

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  17. बढ़िया भावनाओं के लिए शुभकामनायें !!

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  18. घर की दहलीज़ सिसकती रही ....बरबस एक ही शब्द निकला ...ओह ...बहुत खूबसूरत ..

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  19. सदा जी बहुत सुंदर कविता आपने लिखी है बधाई |

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  20. उदासी से भरी भावपूर्ण रचना.

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  21. Badi hi scientific lines hai.. jab koi tootta hai, to bikharta bhi hai...

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  22. Ruswaiyo ko chodker jab bhi wo gaya ,
    gher ki dehleej badi der.............
    kya khub ukera hai aaapne dil ke jajbaton ko badhai...........

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  23. बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति| तीनों रचनाएँ लाजवाब|

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  24. एक नहीं तीनों रचनाएँ, सुंदर अभिव्यक्ति बधाई तो कम है..

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  25. हकीक़त न पूछ मेरे फ़साने की ,

    तेरे जाते ही बदल गए नज़रें ज़माने की ,

    लोग कहते हैं की खुश हूँ में ,

    लेकिन मेरी तो आदत है गम में मुस्कुराने की |

    बहुत खुबसूरत |

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  26. बेहतरीन क्षणिकाये . पढ़कर मन आल्हादित हुआ .

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  27. तीनों कविताएं बहुत सुन्दर.....एक-एक शब्द भावपूर्ण ...
    हार्दिक शुभकामनाएं !

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  28. टूट के बिखरना मुझको ज़रूर आता है....
    ये कैसा प्रश्न है?
    आशीष
    --
    लम्हा!!!

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  29. सारी क्षणिकाएं उम्दा है, अंतिम वाली बहुत पसंद आई |

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....