मन आज अकेला नहीं
रहना चाहता
वह खोज रहा है अपनी टोली
कुछ शैतानियां कुछ जिज्ञासाओं को
अपने काँधे पे बिठाकर
आ बैठा आंगन में
यादों की गुल्लक को सीने से लगाये
जिसमें डाले थे कभी कुछ पल
हँसी के कुछ अपनेपन के
कुछ कीमती लम्हे थे
तुम्हारे साथ बिताये हुए
ये जमा पूँजी सम्बंधों की स्नेहवत
मैने तुम्हारे कहने पर ही
सिंचित की थी
...
आओ तुम भी शामिल हो जाओ
मेरी इस टोली में
तुम्हारी शैतानियां मेरी शैतानियों के
कान खींचती हैं तो
दर्द में भी एक मुस्कान होती है
फिर तुम्हे तंग करने का
मौका कैसे जाने दूँ
आज मैं टोली के साथ हूँ
बस एक कमी है
वो तुम्हारे आने से दूर हो जाएगी
...
रहना चाहता
वह खोज रहा है अपनी टोली
कुछ शैतानियां कुछ जिज्ञासाओं को
अपने काँधे पे बिठाकर
आ बैठा आंगन में
यादों की गुल्लक को सीने से लगाये
जिसमें डाले थे कभी कुछ पल
हँसी के कुछ अपनेपन के
कुछ कीमती लम्हे थे
तुम्हारे साथ बिताये हुए
ये जमा पूँजी सम्बंधों की स्नेहवत
मैने तुम्हारे कहने पर ही
सिंचित की थी
...
आओ तुम भी शामिल हो जाओ
मेरी इस टोली में
तुम्हारी शैतानियां मेरी शैतानियों के
कान खींचती हैं तो
दर्द में भी एक मुस्कान होती है
फिर तुम्हे तंग करने का
मौका कैसे जाने दूँ
आज मैं टोली के साथ हूँ
बस एक कमी है
वो तुम्हारे आने से दूर हो जाएगी
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