गुरुवार, 7 दिसंबर 2017

स्मृति हाज़मे की !!

स्मृतियों को मन की
फ़िक्र रहती है
तभी तो वो उसे
अकेला छोड़ती नहीं हैं
कोई खट्टी-मीठी
स्मृति हाज़मे की
खाई है कई बार
जब भी कभी
अकेलेपन की
बदहजमी हुई है 😊

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (08-12-2017) को "मेरी दो पुस्तकों का विमोचन" (चर्चा अंक-2811) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. खट्टी मेढ़ी यादें जरूरी हैं एकाकी पन दूर करने के लिए ...
    बहुत खूब ...

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  3. गज़ब दिल पाया है आपने अहसासों को महसूस करना...फिर शब्दों में ढालना...कमाल है...

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....