सोमवार, 30 अक्तूबर 2017

उम्मीद की हथेली !!!

बदल जाने के लिए
वक़्त होता है रिश्ते नहीं
रूठें तो मनाओ
मन की गिरह खोलो
अपनेपन की ऊँगली
पकड़कर पार कर लो
हर मुश्किल को !!
...
कुछ रिश्ते 
होते हैं सच्चे
झूठ की गिरफ़्त से 
कोसों दूर
जैसे यक़ीन के काँधे पर
टिकी हो कोई
उम्मीद की हथेली !!

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 108वां जन्मदिवस : डॉ. होमी जहाँगीर भाभा - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. उम्मीद पर ही जिंदगी हैं। सुंदर प्रस्तुति।

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....