गुरुवार, 2 नवंबर 2017

कुछ रिश्ते !!!

कुछ रिश्ते
होते हैं कुम्हार से
गढ़ते ही नहीं
आकार भी दे देतें हैं
जीवन को ।
..
कुछ रिश्ते
होते हैं अजनबी से
अन्जाने बिना नाम के
शायद भावनाओं के
जो वक़्त और
परिस्थिति से निर्मित
मन के आँगन में
बने और पनपे होते हैं।
...

10 टिप्‍पणियां:

  1. वाह्ह्ह....बहुत सुंदर रचना👌

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (04-11-2017) को
    "दर्दे-ए-दिल की फिक्र" (चर्चा अंक 2778)
    पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    कार्तिक पूर्णिमा (गुरू नानक जयन्ती) की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी रचना की प्रशंशा के लिए मेरे पास हमेशा शब्द कम पड़ जाते हैं......कमाल का लिखती हैं आप...कहाँ से आती हैं ये लाजवाब नज्मे

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. 😊 जहाँ से आप ये प्रोत्साहन के शब्द लाते हैं ... बहुत वहुत आभार भाई !!!

      हटाएं
  4. कुछ रिश्ते
    होते हैं अजनबी से.....बहुत खूब :)

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  5. रिश्तों का अजब संसार है ... पर हर रिश्ताराहता है दिल के करीब ...
    सटीक भाव ...

    उत्तर देंहटाएं

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....