शनिवार, 6 अगस्त 2016

दोस्‍त है वही !!!

सुबह शाम
कैसे हो दोस्‍त कहे
मेरा ये मित्र !
...
संग दोस्‍त का
अनमोल ये पल
साथ हैं हम !
...
फूल दोस्‍ती का
साथ निभाते हुये
महका करे !
...
साथ चले जो
दूर रहकर भी
दोस्‍त है वही !
...
दोस्‍त जिंदगी
रिश्‍ता ईमान का ये
जान से प्‍यारा !
...
रिश्‍ता दोस्‍ती का
जिंदगी को सौग़ात
मिली रब से !!

14 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  2. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु हमला और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। सादर ... अभिनन्दन।।

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  3. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 08 अगस्त 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. जीत की सीढ़ियों पर की
    एक प्रति चाहिए
    विज्ञापन ब्लॉग देखने में
    बाधा उत्पन्न कर रहा है
    सादर

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  5. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (08-08-2016) को "तिरंगा बना देंगे हम चाँद-तारा" (चर्चा अंक-2428) पर भी होगी।
    --
    मित्रतादिवस और नाग पञ्चमी की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. दूर भी हों पर उनके होने के
    अहसास जब पास ही होते
    वही दोस्त कहलाते हैं

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  7. वाह ... मस्त हैं सभी हाइकू दोस्ती पर ... बधाई ...

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  8. आज कल हाइकू पर जोर है .... दोस्ती पर अर्थवान हाइकू

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....