बुधवार, 17 अगस्त 2016

कलाई राखी सजे !!!













अक्षत रोली
लगाकर भाई को
बाँधी है राखी !
...
पवित्र रिश्‍ता
विश्‍वास का बँधन
कायम रखे !
...
रेशम डोर
कलाई से बँधे तो
दुआ बनती ! 
...
माथे तिलक
कलाई राखी सजे
खुश हो भाई !
...
दुआ की डोर
बाँधे पावन रिश्‍ता
सदा के लिए !
...

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 18-8-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2438 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  2. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति अमर क्रान्तिकारी मदनलाल ढींगरा जी की १०७ वीं पुण्यतिथि और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। सादर ... अभिनन्दन।।

    उत्तर देंहटाएं
  3. दुआ की डोर सलामत रहे..सुंदर..शुभकामनाएं

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  4. बहुत खूब .. राखी पे बहुत ही पावन और लाजवाब हाइकू ...

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....