शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

रूह से पूछो ....








हर धड़कन का सच

रूह से पूछो

वो वाकिफ है इसकी

हर सदा से ....।

किसी का इंतजार हो

धड़कन को तो

यह बेकरार हो जाती

हर आहट पर

चौंकती ....।

किसी की चाहत में

सजती जाती

निखरती रहती हर पल

संवरने के लिए ....।

किसी की जुदाई मे

यह तो बस

लाचार हो जाती

नयनों से आंसुओं की

जैसे बरसात हो जाती ....।

23 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय सदा जी
    नमस्कार !
    सजती जाती

    निखरती रहती हर पल

    संवरने के लिए ....।

    किसी की जुदाई मे

    यह तो बस

    लाचार हो जाती

    नयनों से आंसुओं की

    जैसे बरसात हो जाती ....।

    बहुत ही सुंदर .... एक एक पंक्तियों ने मन को छू लिया ...

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  2. बहुत सुन्दर अहसास को शब्दो मे पिरोया है

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  3. ....एक एक पंक्ति कबीले तारीफ है
    ..बहुत ख़ूबसूरत...ख़ासतौर पर आख़िरी की पंक्तियाँ....मेरा ब्लॉग पर आने और हौसलाअफज़ाई के लिए शुक़्रिया..

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  4. बेहद अच्छी लगी ये कविता!

    सादर

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  5. नयनों से आंसुओं की
    जैसे बरसात हो जाती

    मन की कोमल भावनाओं को अभिव्यक्त करती एक उत्तम कविता।

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  6. गहरे भाव लिए एक बेहद ही सुन्दर रचना। धन्यवाद।

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  7. बहोत ही गहरे भावों से युक्त सुन्दर कविता ........

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  8. कोमल भावनाओं का सुन्दर समन्वय्।

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  9. यह रूह और मुहब्बत लाइलाज है ...खूबसूरत अभिव्यक्ति

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  10. धड़कनों की बातें बस रूह जानती है
    एक रूहानी अर्थ दे जाती है

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  11. बहुत सुंदर रचना....इतनी पसंद आई कि ब्लॉग फॉलो कर लिया

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  12. हर धड़कन का सच
    रूह से पूछो
    वो वाकिफ है इसकी
    हर सदा से ....!
    आदरणीय सदा जी , आपने अनुभूत सत्य को सामने लाने का प्रयास किया है ...बहुत गजब ...पूरी कविता भावों की गहराई से ओत प्रोत है ...शुक्रिया

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  13. बहुत खूब ... क्या खूब कहा .. धड़कन का राज रूह समझती है ... बेहतरीन रचना है ...

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  14. भावुक करने वाली अत्यंत कोमल रचना

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  15. ये रूह भी बडी अजीब चीज़ है। अच्छी लगी रचना। बधाई।

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....