सोमवार, 14 दिसंबर 2009

कोई लहर ...


किनारा आज इतना सूना है

लगता है

कोई लहर आज

इस तरफ नहीं आई

इसे भी आदत हो गई है

लहरों की

सूखापन रेत का

इसे सालता रहता है

अठखेलियां लहरों की

जो चुपके से आ के

छू जाती हैं

इसका एक एक कण

भीग जाता है इसका अन्‍तर्मन ।

13 टिप्‍पणियां:

  1. किनारा आज इतना सूना है
    लगता है आज कोई लहर इस तरफ नहीं आई ...!

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  2. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति के साथ ....बहुत खूबसूरत रचना......

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  3. आपने शब्दों से अंतर्मन को भिगो दिया ..... सुंदर रचना ......

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  4. इसे सालता रहता है

    अठखेलियां लहरों की

    जो चुपके से आ के

    छू जाती हैं

    इसका एक एक कण

    भीग जाता है इसका अन्‍तर्मन
    bahut sundar racanaa hai badhaaI

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत खूब अच्छी रचना
    बहुत -२ आभार

    उत्तर देंहटाएं
  6. रचना में हरेक शब्द मोती की तरह पिरोया गया है!
    बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  7. जो चुपके से आ के

    छू जाती हैं

    इसका एक एक कण

    भीग जाता है इसका अन्‍तर्मन ।
    बहुत सुन्दर.

    उत्तर देंहटाएं
  8. जो कर्मशील हैं, किनारे बैठना नहीं चाहते
    उन्हें मझधार में तैरना अच्छा लगता है..
    मगर जिनकी नीयति ही किनारे पर बैठना हो
    उनके दर्द की इंतिहां हो जाती है..!
    वैसे ही किनारे को भी रेत का सूनापन सालता रहता है
    वह भी चाहता है कि लहरों की अठखेलियाँ उसके अंतर्मन को भिंगो दे।
    ---आपकी कविता में गज़ब का दर्शन है
    बहुतों ने उन पर लिखा है जिनकी नीयति किनारे पर बैठना है
    मगर आपने तो किनारे का दर्द ही उकेर दिया।
    -वाह!

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  9. मन को भिगोती हुई रचना....खूबसूरत अभिव्यक्ति

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  10. बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में

    Sanjay kumar
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....