बुधवार, 28 फ़रवरी 2018

होली है होली !!!


प्रेम फागुनी
मन के उत्सव में
भीगता रहे !
..
धरा ने खेला
अम्बर संग रंग
मचा धमाल !
...
होली के रंग
अपनों के संग हैं
कहे फागुन !
...
होली के रंग
पिचकारी के संग
भीगे गुलाल !
...
पीकर भंग
बोले होली है होली
रंगों की टोली !


5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (01-03-2017) को "जला देना इस बार..." (चर्चा अंक-2897) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (02-03-2017) को "जला देना इस बार..." (चर्चा अंक-2897) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    रंगों के पर्व होलीकोत्सव की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही सुन्दर हाइकू
    होली पर्व की हार्दिक बधाई.....

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर हाइकू ...
    होली का रंग बिखरा हो जैसे इन शब्दों में ... लाजवाब ...
    आपको होली ही बधाई ...

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  5. अच्छी हाइकू . आपके जीवन में हर रंग बना रहे .

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....