सोमवार, 14 सितंबर 2015

हर दिन इसका हो !!!!

भाषा हिन्‍द की
माँ बोली वो
लगे एक पहचान सी
इसका अपनापन
मन में उतरे
जैसे माँ की सहजता !
...
हिन्‍दी गर्व की
वो बिन्‍दी है
जिसके लग जाने से
मन मस्तिष्‍क को
मान के साथ
सम्‍मान भी देता है !!
...
आओ इसको
दिवस की विशेषताओं से परे
बसा लें ऐसे संकल्पित हो
पखवाड़ा ही नहीं
हर दिन इसका हो !!!!



5 टिप्‍पणियां:

  1. हिन्‍दी गर्व की
    वो बिन्‍दी है
    जिसके लग जाने से
    मन मस्तिष्‍क को
    मान के साथ
    सम्‍मान भी देता है !!

    हिंदी दिवस पर अनेकानेक शुभकामनायें.

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  2. हाँ! गर्व की बिंदी को हम सबने माथे से लगाया है .

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  3. बहुत सुन्दर कविता .....हर दिन इसका हो.....

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....