रविवार, 25 जनवरी 2015

तिरंगे का उत्‍सव !!


तिरंगे का उत्‍सव मनाता बचपन
फूलों की तरह मुस्‍काता बचपन ।

वीरों की गाथाओं का कर स्‍मरण,
शीष अपना हरदम झुकाता बचपन ।

वंदे मातरम् कह बुलंद आवाज में
तिरंगे के साये में इतराता बचपन ।

भारत माता की छवि लिये मन में,
विजय के गीत गुनगुनाता बचपन ।

नाउम्‍मीदी के हर दौर में भी सदा
बन के उम्‍मीद मुस्‍कराता बचपन ।





8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति, गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाये।

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  2. बहुत सुन्दर ... भावपूर्ण ग़ज़ल ... बचपन खिलता रहेगा तो देश बढेगा ...

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  3. बहुत भावपूर्ण उम्दा ग़ज़ल...

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  4. बहुत भावपूर्ण उम्दा ग़ज़ल...

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  5. बचपन के दिन भी क्या दिन हैं...हर उत्सव अपना लगता है...

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  6. अनुपम रचना...... बेहद उम्दा और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@मेरे सपनों का भारत ऐसा भारत हो तो बेहतर हो
    मुकेश की याद में@चन्दन-सा बदन

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  7. छोटे भाव की बड़ी भावपूर्ण ग़ज़ल


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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....