बुधवार, 9 अक्तूबर 2013

जड़ता का सिद्धांत !!!!!

नियमों के विपरीत
चलकर कभी देखोगे तो
कुछ अलग ही दृश्‍य दिखाई देगा
कभी जड़ता का सिद्धांत
पढ़कर समझ पाओगे यह भी
कि जड़ होना इतना आसान भी नहीं
टिका रहता है समूचा अस्तित्‍व इस पर
...
अच्‍छी बातें, अच्‍छे विचार
पढ़कर कितना अच्‍छा लगता है,
पर अनुसरण कितने ही कर पाते हैं
इस अच्‍छाई पर  ?
सच्‍चाई की राह पर चलने की सीख देना
भला मानव कहलाना कितना ही प्रिय लगता है
वह भला शख्‍स, और सच की टेक  पर
हर कदम आगे बढ़ाता हुआ आदर्श व्‍यक्तित्‍व
जाने कितनी आंखों की किरकिरी होता है  !
.....
जो श्रेष्‍ठ है वह तो सदा श्रेष्‍ठ ही रहेगा,
हेर-फेर तो हमारी सोच का होता है
झूठ कितने ही लिबास बदल ले
कितने ही नकाब लगा ले
पर सच्‍चाई हमेशा बेनकाब होती है
यही उसकी जड़ता का सिद्धांत है !!!!!

33 टिप्‍पणियां:

  1. सच्चाई हमेशा बेनकाब होती है ....पर्दा तो पहचानने वाली अक्ल पे होता है ........

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  2. सच कहा है सचाई बेनकाब होती है ... उसको रोकना झूठ के अंधेरे के बस में तो नहीं होता ...

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  3. लंबी आयु दे
    लक्ष्मी- ब्रह्माणी कृपा
    बरकत दे
    ब्रह्माणी=सरस्वती

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  4. झूठ कितने ही लिबास बदल ले
    कितने ही नकाब लगा ले
    पर सच्‍चाई हमेशा बेनकाब होती है
    यही उसकी जड़ता का सिद्धांत है !!!!!
    बहुत बढ़िया....

    सस्नेह
    अनु

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  5. राह आसान न हो कठिन ही सही विजयी सच्चाई ही होती है …
    हमेशा की तरह अनुपम भाव से सजी सुन्दर रचना ...

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  6. अच्‍छी बातें, अच्‍छे विचार
    पढ़कर कितना अच्‍छा लगता है,
    पर अनुसरण कितने ही कर पाते हैं
    इस अच्‍छाई पर ?..............100% agreed

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  7. श्रेष्ठ होड़ में नहीं होता,तिकड़में नहीं लगाता - क्षुब्ध होकर भी,निराश होकर भी - श्रेष्ठ श्रेष्ठ है

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  8. श्रेष्ठता से
    कोई होड़ नही
    और ...
    श्रेष्ठता का
    कोई जोड़ भी नहीं
    जो है सो ही है
    सादर

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  9. सत का अभाव नहीं और असत की सत्ता नहीं...परम सत्य !

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  10. झूठ कितने ही लिबास बदल ले
    कितने ही नकाब लगा ले
    पर सच्‍चाई हमेशा बेनकाब होती है
    यही उसकी जड़ता का सिद्धांत है !!!!!

    झूठ के पैर नहीं होते वो हवा मे घूमता है और हर जगह मात खाता है ।

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  11. पर सच्‍चाई हमेशा बेनकाब होती है|
    लेटेस्ट पोस्ट नव दुर्गा
    नई पोस्ट साधू या शैतान

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  12. !झूठ कितने ही लिबास बदल ले,सचाई बेनकाब होती है
    नवरात्रि की शुभकामनाएँ .,,,

    RECENT POST : अपनी राम कहानी में.

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  13. बढ़िया प्रस्तुति-
    आभार
    नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें -

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  14. सच की खोज में कई बार विपरीत भी चलना पड़ता है।

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  15. बहुत सही कहा..नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें -

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  16. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (10-10-2013) "दोस्ती" (चर्चा मंचःअंक-1394) में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का उपयोग किसी पत्रिका में किया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  17. बहुत सही विश्लेषण किया है सदा जी आपने हार्दिक बधाई

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  18. जो श्रेष्‍ठ है वह तो सदा श्रेष्‍ठ ही रहेगा,
    हेर-फेर तो हमारी सोच का होता है
    झूठ कितने ही लिबास बदल ले
    कितने ही नकाब लगा ले
    पर सच्‍चाई हमेशा बेनकाब होती है
    यही उसकी जड़ता का सिद्धांत है !!!!!

    सदा जी सच्चाई को सामने लाइए झूठ को जैसे भी हो बे -नकाब करिए। सच्चाई का खुलासा एक बार फिर से कीजिये बढ़िया बेहद बढ़िया विचार कविता दी है आपने ब्लॉग जगत को। आभार।

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  19. झूठ के होते नहीं हैं पाँव -रखलो गांठ में ,

    सब मुखौटे एक दिन गिर जायेंगे।

    भैंस का चारा कभी पचता नहीं।

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  20. सारगर्भित ....बहुत सुंदर .....तथ्य पूर्ण .....!!

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  21. मनुष्य के जड़ होने से अभिप्राय मृत्यु है। वृक्ष के जड़ पर संपूर्ण सृजन टिका हुआ है। जड़ता का सिद्धांत कुछ समझ में नहीं आया।

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    उत्तर
    1. जड़ता का अभिप्राय सिर्फ मृत्यु नहीं स्तब्द्धता भी है - निष्प्राण मनःस्थिति मृत नहीं होती,पृथक चलती साँसों से परिवर्तन की प्रतीक्षा में होती है

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  22. अच्‍छी बातें, अच्‍छे विचार
    पढ़कर कितना अच्‍छा लगता है,
    पर अनुसरण कितने ही कर पाते हैं
    इस अच्‍छाई पर ?-----

    रचना में जीवन दर्शन का अदभुत प्रयोग
    नये कथ्य की नयी रचना
    बहुत सुंदर
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  23. जो श्रेष्‍ठ है वह तो सदा श्रेष्‍ठ ही रहेगा,
    हेर-फेर तो हमारी सोच का होता है
    झूठ कितने ही लिबास बदल ले
    कितने ही नकाब लगा ले
    पर सच्‍चाई हमेशा बेनकाब होती है
    यही उसकी जड़ता का सिद्धांत है !!!!!

    बहुत गहरी बात..ये संभवतः आपके ब्लॉग पर ही पढ़ने मिल सकती है।।।

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  24. हाँ सच्चाई की उजास कायम रहती है सच्चाई न घटती है न बढ़ती है न रूप बदलती है ,नकाब झूठ ओढ़ता है।कम ज्यादा होता है। बढ़िया भाव सम्प्रेषण।

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  25. पर सच्‍चाई हमेशा बेनकाब होती है
    यही उसकी जड़ता का सिद्धांत है !!!!!

    सीधी सच्ची बात पर सुंदर प्रस्तुति।

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....