गुरुवार, 19 सितंबर 2013

माँ का तर्जुबा !!!












माँ का तर्जुबा
रह-रहकर मेरी आँखों में झाँकता रहा,
मेरे चेहरे की उदासियों को पढ़ता
फिक्र की करवटें बदलता कभी,
फिर सवालों की बौछार भी करता
पर मेरी खामोशियों का वाईपर,
जाने कब उन्‍हें एक सिरे से
साफ कर देता
एक मुस्‍कान :) ही तो चाहती थी माँ
मैं ले आती बनावटी हँसी
खिलखिलाकर हँसती
माँ बुझे मन से कहती
चल जाने दे मैं तुझसे बात नहीं करती
गलबहियाँ डाल मैं
डालती सब्र की चादर भी
उनकी पलकों पर
सीखने दो मुझे भी
उलझनों के पार जाकर कैसा लगता है
समझने दो न
तुम्‍हारी फिक्र है न मेरे साथ
यकीन मानो वो दुआ का काम करेगी  !
....
कुछ सोच माँ
निर्णय की स्थिति में आती
मन की कसमसाहट पे
थोड़ा अंकुश लगाती
मेरी नादानियों पर
गौर करना भी सिखलाती
तो कोशिशों को जीतने का फ़न भी बताती
मेरी हर मुश्किल पे
हौसले की मुहर जब  लगाती
यकीं मानो उन पलों में
मैं हारकर भी जीत जाती !!!

28 टिप्‍पणियां:

  1. एक मुस्‍कान :) ही तो चाहती थी माँ
    मैं ले आती बनावटी हँसी
    खिलखिलाकर हँसती
    माँ बुझे मन से कहती
    चल जाने दे मैं तुझसे बात नहीं करती
    बच्चों की हंसी माबाप की ख़ुशी का आधार है
    latest post: क्षमा प्रार्थना (रुबैयाँ छन्द )
    latest post कानून और दंड

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  2. बहुत सुंदर ....माँ के प्रेम और समझ को संप्रेषित करती बेहतरीन रचना

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  3. बहुत सुन्दर.....हृदयस्पर्शी रचना..

    सस्नेह
    अनु

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  4. माँ समझ जाती है बिन कहे ... ओर बच्चे परीशानी में हों तो माँ तो फ़िक्र में रह्र्गी ही ... माँ से जुडी हर बात ही निराली होती है ... बहुत खूब ...

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  5. वन्दन....
    एक मुस्‍कान :) ही तो चाहती थी माँ
    बस
    और कुछ नहीं

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  6. एक मुस्कान में जी जाती है माँ

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  7. यकीं मानो उन पलों में
    मैं हारकर भी जीत जाती !!!
    ..... बिन कहे समझ जाती है माँ

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  8. नमस्कार आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार (20-09-2013) के चर्चामंच - 1374 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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  9. बहुत ही अपीलिंग काव्य रचना बधाई

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  10. यकीं मानो उन पलों में
    मैं हारकर भी जीत जाती
    बिन कहे समझ जाती है माँ !!!

    बहुत खूब,सुंदर रचना !
    RECENT POST : हल निकलेगा

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  11. आज की ब्लॉग बुलेटिन चुप रहनें के फ़ायदे... ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ...

    सादर आभार !

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  12. हौसले की मुहर जब लगाती
    यकीं मानो उन पलों में
    मैं हारकर भी जीत जाती !!!

    माँ का साथ हमेशा हौसला देने वाला होता है

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  13. माँ सा दोस्त कोइ हो ही नहीं सकता |
    "कुछ सोच माँ
    निर्णय की स्थिति में आती
    मन की कसमसाहट पे
    थोड़ा अंकुश लगाती
    मेरी नादानियों पर
    गौर करना भी सिखलाती"
    भाव पूर्ण पंक्तियाँ

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  14. रिश्तों की गहराई को महसूस कराती सुंदर रचना !

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  15. खूबसूरत हैं माँ की यादे भी

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  16. मेरी हर मुश्किल पे
    हौसले की मुहर जब लगाती
    यकीं मानो उन पलों में
    मैं हारकर भी जीत जाती !

    आपने सच कहा माँ ऐसी ही होती है

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  17. सुन्दर रचना!
    शुभकामनाएं!

    उत्तर देंहटाएं
  18. वाह बहुत सुन्दर भाव

    'मां' के बारे में जितना कहो उतना कम है.

     आंधी

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  19. माँ - बेटी का अटूट रिश्ता.........बहुत ही सुन्दर पोस्ट |

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  20. माँ के प्रेम से लबरेज़ खूबसूरत रचना ...

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  21. उस पल की हार जीत से कम नहीं !
    बहुत बढ़िया !

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  22. माँ के तजुर्बे के आगे सब नत हो जाते हैं ...

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  23. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" गुरुवार, कल 28 जनवरी 2016 को में शामिल किया गया है।
    http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमत्रित है ......धन्यवाद !

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....