शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

हंस के मना लेती है मां .....











कोई
रूठता है तो तब हंस के मना लेती है मां,
खुद के सारे गम जाने कहां छिपा लेती है मां ।

आहत होती है जब भी कभी हद से ज्‍यादा वो,
तब बस खामोशी का पहरा लगा लेती है मां ।

दस्‍तक दरवाजे पे देने से पहले खोलती दरवाजा,
मेरे आने का अंदाजा जाने कैसे लगा लेती है मां ।

खजाना अनमोल रखती है मन में सब के लिए,
मुश्किल घड़ी मैं जाने कैसे मुस्‍करा लेती है मां ।

मेरी हंसी मेरे आंसुओं से कीमती है कहकर जब,
आंचल में सर मेरा अपने जब छिपा लेती है मां ।

27 टिप्‍पणियां:

  1. आहत होती है जब भी कभी हद से ज्‍यादा वो,
    तब बस खामोशी का पहरा लगा लेती है मां ।

    सटीक अभिव्यक्ति ... सुन्दर रचना

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  2. दस्‍तक दरवाजे पे देने से पहले खोलती दरवाजा,
    मेरे आने का अंदाजा जाने कैसे लगा लेती है मां
    सुन्दर अभिव्यक्ति

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  3. मेरी हंसी मेरे आंसुओं से कीमती है कहकर जब,
    आंचल में सर मेरा अपने जब छिपा लेती है मां ।

    माँ के सहज उपकारों की गहन सम्वेदना अभिव्यक्ति!!

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  4. मेरी हंसी मेरे आंसुओं से कीमती है कहकर जब,
    आंचल में सर मेरा अपने जब छिपा लेती है मां ।

    माँ......मैं क्या कहूँ तेरे लिए....तू ही बता न......

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  5. आदरणीय सदा जी..
    नमस्कार !
    बेहतरीन भाव लिए रचना।
    शब्‍द नहीं सूझ रहे....... क्‍या लिखूं इस पर।

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  6. सुन्दर संवेदनशील अभिव्यक्ति...

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  7. बहुत सुन्दर.......माँ तो माँ है उस जैसा सारी जिंदगी कोई नहीं हो पाता|

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  8. कोई रूठता है तो तब हंस के मना लेती है मां,
    खुद के सारे गम जाने कहां छिपा लेती है मां ।

    आहत होती है जब भी कभी हद से ज्‍यादा वो,
    तब बस खामोशी का पहरा लगा लेती है मां ।

    दस्‍तक दरवाजे पे देने से पहले खोलती दरवाजा,
    मेरे आने का अंदाजा जाने कैसे लगा लेती है मां

    khoobsoorat ahsaason ki sundar rachana.

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  9. तभी तो माँ को भगवान से भी ऊपर स्थान दिया गया है ........माँ तो माँ होती है ....आभार इतनी प्यारी रचना पढ़ने का अवसर देने के लिए

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  10. माँ ऐसी ही होती है..सुन्दर रचना

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  11. ममतामयी माँ पर आपने बहुत सुन्दर ग़ज़ल लिखी है!
    आभार इसे प्रकाशित करके पढ़वाने के लिए!

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  12. कोई रूठता है तो तब हंस के मना लेती है मां,
    खुद के सारे गम जाने कहां छिपा लेती है मां ।

    आहत होती है जब भी कभी हद से ज्‍यादा वो,
    तब बस खामोशी का पहरा लगा लेती है मां ।
    Bemisaal panktiyan hain!

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  13. कल ,शनिवार ३०-७-११ को आपकी किसी पोस्ट की चर्चा होगी नयी -पुरानी हलचल पर..कृपया अवश्य पधारें ..!!

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  14. ममत्व को उकेरती रचना सुंदर लगी.

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  15. मेरी हंसी मेरे आंसुओं से कीमती है कहकर जब,
    आंचल में सर मेरा अपने जब छिपा लेती है मां ।
    ....bahut badiya MAA kee mamtamayee prastuti..

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  16. मेरी हंसी मेरे आंसुओं से कीमती है कहकर जब,
    आंचल में सर मेरा अपने जब छिपा लेती है मां ।

    माँ के प्यार का और उसकी भावनाओं सुंदर एहसास. अद्भुत.

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  17. आपने बहुत सुन्दर शब्दों में अपनी बात कही है। शुभकामनायें।

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  18. भाव पूर्ण माँ का एक शब्द चित्र हम सका सहभावित चित्त सा .कृपया यहाँ भी http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/पधारें -
    http://sb.samwaad.com/

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  19. मां का प्यार अनमोल है..भाव पूर्ण अभिव्यक्ति....

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  20. आहत होती है जब भी कभी हद से ज्‍यादा वो,
    तब बस खामोशी का पहरा लगा लेती है मां ,,,

    माँ को बहुत करीब से लिखा है आपने ... गहरी रचना ...

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....