बुधवार, 20 जुलाई 2011

संदेशा बादल का .....











रिमझिम ... रिमझिम
गिरती बूंदे
लाई संदेशा बादल का
धरती पे
प्‍यास बुझा लो अपनी
नभ विचलित है ...
मुस्‍काती धरती स्‍नेह से
अम्‍बर को देखकर
महकी हैं सारी फिजा़एं,
उमड़ी हैं काली घटाएं
देखो तो दी हैं किसने सदाएं ...
कोई बूंद
ठहरी है आकर पत्‍ते पर
थिरक सी रही टहनी कोई
बातें करती फूलों से ...
इस बूंद ने देखो
किसी को जीवनदान दिया
कोई बीज
फिर अंकुरित हुआ
उसके नवांकुर
देख रहे सहमे से इन फुहारों को ...
कोई गली आज नदी हो गई
किसी छत से
बहा है झरना जोर का
नाव कागज की बनाकर
बच्‍चे खुश हैं उसको यूं बहाकर
गिरा है कोई फिसलकर
उठ रहा है फिर भी मुस्‍कराकर ...
उनकी शैतानियों को देखो
इन बूंदों के संग
मन मोर हुआ जाता है
तभी तो देखो
बचपन कैसे खिलखिलाता है ...।।

27 टिप्‍पणियां:

  1. बारिश के इस सुहाने मौसम में शानदार पोस्ट|

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  2. बदल का सन्देश बहुत खूबसूरती से शब्दों में बाँधा है

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  3. बरखा बहार का अच्छा चित्रण .....

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  4. ये बारिश की फुहारें कितना कच नया ले कर आती हैं .. नए कीट, पतंगे ... नई कोंपलें नए स्वप्न ... रूमानी मौसम ... बहुत लाजावाब रचना है ...

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  5. आदरणीय सदा जी
    नमस्कार !
    लाजावाब रचना है
    रचना सोच रहा हूं ...किसकी तारीफ करूं सुंदर कविता की ...आपकी सोच की ...या लेखनी की

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  6. लीजिए सावन आ गया है साथ में बूंदों से भरी ढेर सारी कविताओं की बौछार भी!.... इस मौसम का ये हरा रंग बहुत पसंद आया.....

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  7. बदल का सन्देश बहुत ही प्यारा है बहुत ही खुबसूरत रचना

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  8. SADA ji namaskaar,

    aapki rachna bahut achhi lagi muje.....
    jaisa samay...vaisi rachna....
    mere blog par aakar mera bhi honsala badaiye....
    abhar....

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  9. waah... baaarish ka bahut pyara drishya... aur is baar to paani barsa bhi bahut...

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  10. बारिश का बचपन से पुराना सम्बन्ध है।

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  11. मौसम सुहावना हो जाए तो मन में भी सुहावना मौसम बन जाता है.

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  12. रिम-झिम की फुहारों जैसी ही सुहानी रचना...सुन्दर...

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  13. बहुत सुन्दर भीगी-भीगी-सी भावाभिव्यक्ति....

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  14. बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना ! हार्दिक शुभकामनायें !

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....