बुधवार, 13 जुलाई 2011

कोई खिलौना चाबी वाला ....












कोई खिलौना चाबी वाला
अगर मैं होता तो
कैसा होता
जब मन करता किसी का
मुझको चलाता
जब मन होता कोने में मुझको रख देते,
तुम ये मत करो,
वो मत करो
बाहर मत जाओ छोटे हो अभी,
कभी कहते हैं
इतने बड़े हो गये फिर भी
हर समय शैतानी करते रहते हो
सब आफिस जाते हैं
मम्‍मी हो या पापा
मैं अकेला आया के साथ
रहता हूं घर पर
टीवी पर कार्टून भी नहीं देखने देती वो मुझको
खुद देखती है
भूख लगती है तो बस एप्‍पल दे देती है
या गंदा लगने वाला दूध
मुझको पीना पड़ता है ....
क्‍या मैं भी जल्‍दी से बड़ा हो सकता हूं
बड़ा होकर फिर
मैं भी आफिस जा सकता हूं .....।

27 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय सदा जी..
    नमस्कार !
    कोई खिलौना चाबी वाला
    अगर मैं होता तो
    कैसा होता
    जब मन करता किसी का
    मुझको चलाता
    जब मन होता कोने में मुझको रख देते,
    ...............बिलकुल सही कहा है फिर तो मन मर्जी से कम किया जाता !

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  2. अच्छी रचना...अंतिम पंक्तियाँ तो बहुत ही अच्छी लगीं.

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  3. बाल मन के भावों का सुन्दर प्रस्तुतीकरण

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  4. बहुत ही सुन्दर
    आपकी रचना तेताला पर भी है ज़रा इधर भी नज़र घुमाइये
    http://tetalaa.blogspot.com/

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  5. सुंदर बाल मन के भाव हैं सदा जी ......
    बहुत सुंदर ......!!

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  6. खुबसुरत बाल कविता ...मानो बचपन याद आ गया ...

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  7. बच्चों मनोभावों को बख़ूबी बयान करती शानदार पोस्ट|

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  8. बचपन पर भय, उपेक्षा और असंतोष का कितना बोझ रहता है उसे आपकी कविता बखूबी ब्यान करती है.

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  9. खिलौना होना ज्यादा बेहतर ..मगर किसी को कोई खिलौना ना बना डाले... आपकी कविता बहुत सुन्दर और एक अलग विषय पर ..उम्दा

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  10. बाल-अभिलाषा पर सुन्दर पंक्तियाँ।

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  11. बाल मनोभावों पर सुन्दर पंक्तियाँ

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  12. bacche ko khabar nahi ki tamaam umr use chabi wale khilone ki tarah hi bane rahna hai aur bade hoker bhi jimmedariyon ka vehan karna hai.

    sunder abhivyakti.

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  13. कल 15/07/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  14. क्‍या मैं भी जल्‍दी से बड़ा हो सकता हूं
    बड़ा होकर फिर
    मैं भी आफिस जा सकता हूं .....।

    बाल-मन की भावनाओं की प्रभावी अभिव्यक्ति .......

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  15. इस कविता के साथ या तो चित्र होता ही नहीं, या फिर कोई भारतीय चित्र होता तो कितना अच्‍छा रहता।

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  16. बाल-मन की मासूम भावनाओं की प्यारी-प्यारी अभिव्यक्ति...

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  17. बच्चा सोचता है,कब बड़ा हो जाऊँ , बड़े सोचते हैं-काश फिर से छोटा हो जाऊँ.बाल-मन की सुंदर कल्पना को शब्द दिये हैं,बधाई.

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....