बुधवार, 30 जून 2010

शुभा होता है .....



हिचकियों के आने से तेरे,

याद करने का शुभा होता है ।

यादे होती हैं सहारा इंसान का,

जिनसे हर शख्‍स बंधा होता है ।

तनहाईयां डस लेती आदमी को,

परछाईयों का इनपे पहरा होता है ।

मिलना-बिछड़ना खेल तकदीर के,

आदमी बस इक खिलौना होता है ।

दिल की गहराईयों से चाहो जिसे,

बस वही तो दिल में बसा होता है ।

9 टिप्‍पणियां:

  1. हिचकियों के आने से तेरे,

    याद करने का शुभा होता है ।
    वाह क्या बात है अच्छी लगी रचना बधाई

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  2. इस शुभा में ही बीत जाती है ज़िंदगी....खूबसूरत

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  3. दिल की गहराईयों से चाहो जिसे,
    बस वही तो दिल में बसा होता है ।
    --
    सबी शेर बहुत बढ़िया हैं!

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  4. हमेशा की तरह बहुत सुंदर रचना... .

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  5. सुसज्जित रचना ,अच्छे शेरों से

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  6. सच है जो दिल में होता है उससे ही तो प्यार होता है ... अच्छा लिखा है ...

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....