शनिवार, 3 अगस्त 2019

दोस्त एक हो पर सच्चा हो !!!

तेरी बातों के गोलगप्पे
आज भी
मेरी ज़बान का ज़ायका
बदल देते हैं
खिलखिलाते लम्हों के बीच
वो मुस्कराती चटनी इमली की
अपनी यादों में
आज भी शामिल है
सच ही तो कहा करती थी माँ
दोस्त एक हो पर सच्चा हो
उम्रदराज़ भले हो जाओ
पर रहो ऐसे कि
जैसे कोई बच्चा हो !!
....

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (05-08-2019) को "नागपञ्चमी आज भी, श्रद्धा का आधार" (चर्चा अंक- 3418) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं
  2. सच कहती थी माँ ...
    काश हम सब बच्चे रहते तो दोस्त भी बच्चे ही रहते ... समय ने सब बदल दिया ...

    जवाब देंहटाएं

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....