गुरुवार, 22 अगस्त 2019

बड़ी भूख है जिंदगी में !!!

तब्दीलियों की
बड़ी भूख हैं जिंदगी में
हैरान हूँ इसकी खुराक
हर रोज़ बढ़ जाती है
हज़म करना मुश्किल है
फिर भी कितना कुछ
पचाना पड़ता है
कई दफ़ा घूँट-घूँट
बहते आँसुओं के साथ !
पापा, दिन, महीने
बीते बरस के
हर लम्हे ने मुझे आपके साथ
नहीं होने पर भी
हमेशा आपके साथ रखा
हर बार असंभव को
संभव किया
और कहा है मैंने
मुस्कराते हुए
जिसके सर पर अपनों का
हाथ होता है वो
इस बहते खारे पानी को
फिल्टर करते हुये
मुश्किलों में भी मुस्करा ही लेते हैं!!!


11 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २३ अगस्त २०१९ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह सुन्दर भाव अभिव्यक्ति

    जवाब देंहटाएं
  3. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 22/08/2019 की बुलेटिन, " बैंक वालों का फोन कॉल - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर सृजन सीमा जी सार्थक।

    जवाब देंहटाएं
  5. वाह..बहुत ही खूबसूरत रचना..

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत ही लाजवाब सृजन
    वाह!!!

    जवाब देंहटाएं
  7. bahut hi sundar!!! Khare paani ki filtration... mere khayal se ye har chooz ko sona bana dene se bhi adhik mulyavaan hoga… sabko nahi milta ye filtration plant.

    जवाब देंहटाएं
  8. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (24-08-2019) को "बंसी की झंकार" (चर्चा अंक- 3437) पर भी होगी।


    --

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

    आप भी सादर आमंत्रित है

    ….

    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं
  9. सच जिसके सर पर अपनों का हाथ होता है उनकी हर मुश्किल राह आसान हो जाती है
    बहुत अच्छी रचना

    जवाब देंहटाएं
  10. संवेदनशील भाव पूर्ण शब्द ...
    सच है सर पर पिता का हाथ हर राह आसान कर देता है ...

    जवाब देंहटाएं

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....