मंगलवार, 8 मई 2018

जब माँ साथ होती है !!!

जाने कहाँ छिप जाती है
उदासी, ख़ामोशी,
और तन्हाई
जब माँ साथ होती है !!!
...
सारी मुस्कराहटों को
पता होता है
माँ की धड़कनों से
हर कोना हँसता है
और दीवारें
जगमगाती हैं !!!
....


8 टिप्‍पणियां:

  1. बुहार के ले जाती है मेरी राह के नुकीले कांटे व रोड़े अपने आंचल से माँ

    सुंदर रचना

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (09-05-2018) को "जिन्ना का जिन्न" (चर्चा अंक-2965) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

    उत्तर देंहटाएं
  3. टिपण्णी… आप की तरह भावनाओं को शब्द देना आता तो कुछ कहता !

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  4. बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना..माँ जैसा कोई नहीं...

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  5. निमंत्रण

    विशेष : 'सोमवार' २१ मई २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच अपने साप्ताहिक सोमवारीय अंक के लेखक परिचय श्रृंखला में आपका परिचय आदरणीय गोपेश मोहन जैसवाल जी से करवाने जा रहा है। अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/



    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

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  6. माँ का साथ होना जीवन की चपलता है ... साँसें हैं ...
    सुन्दर रचना है ....

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....