सोमवार, 25 जनवरी 2016

सारे जहाँ से अच्‍छा !!!








गणतंत्र की सुबह
उत्‍सव का उल्‍लास लिये
बचपन की हथेली में
कुछ गुलाब हैं
और कुछ पंखुडिया भी
नन्‍हें कदमों में
साधक का भाव है
जयहिन्‍द का स्‍वर
..
मैं ढूँढ़ती हूँ
खुद को
इन नन्‍हें पदचापों में
जो कुहासे से
लिपटी भोर में
उत्‍सुक हैं
तिरंगे के फहराये जाने को
गुलाब की कुछ
पंखुडि़या अर्पित कर
जन मन गण जय हे
गाये जाने को
..
ये दिवस
हमेशा एक उत्‍साह
एक उर्जा लिये
मेरे मन पे
दस्‍तक देता था
देता रहेगा
गणतंत्र दिवस की
पूर्व संध्‍या को ही
सुबह की तमाम
होने वाली
गतिविधियों को
चलचित्र की भांति
पलकों पे संजोये
भारत की शान में
गुनगुना उठता था
सारे जहाँ से अच्‍छा
हिन्‍दोस्‍ता हमारा ...
!! जय हिन्‍द !!

8 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात दीदी

    कुछ गुलाब हैं
    और
    कुछ पंखुडिया भी
    शुभ कामनाएँ

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. मधुर स्मृतियों से सजी कविता..गणतन्त्र दिवस की शुभकामनाएँ !

    उत्तर देंहटाएं
  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " ६७ वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति जी का संदेश " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर .. ..
    गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति। 67 वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  6. जय हिन्द ... शुभकामनायें ...

    उत्तर देंहटाएं

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....