मंगलवार, 30 जून 2020

वक़्त बोल रहा है !!!

सब की बोलती बंद है इन दिनों,
वक़्त बोल रहा है
बड़ी ही ख़ामोशी से
कोई बहस नहीं,
ना ही कोई,
सुनवाई होती है
एक इशारा होता है
और पूरी क़ायनात उस पर
अमल करती है!!!
सब तैयार हैं कमर कसकर,
बादल, बिजली, बरखा
के साथ कुछ ऐसे वायरस भी
जिनका इलाज़,
सिर्फ़ सतर्कता है
जाने किस घड़ी
करादे, वक़्त ये मुनादी.…
ढेर लगा दो लाशों के,
कोई बचना नहीं चाहिये!!
2020 फिर लौट कर
नहीं आएगा,
जो बच गया उसे
ये सबक याद रहेगा,
ज़िंदगी की डोर
सिर्फ़ ऊपरवाले के हाथ में है!!!
....


8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (01-07-2020) को  "चिट्टाकारी दिवस बनाम ब्लॉगिंग-डे"    (चर्चा अंक-3749)   पर भी होगी। 
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  
    --

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  2. मानव को अब तो समझना ही होगा कि उसकी मनमानी नहीं चल सकती, प्रकृति पर सबका समान अधिकार है

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  3. जी सत्य कहा ,ऐसा समय आया है
    और इसके बाद पड़ोसी देशों से निपटना
    अब असहनीय होता जा रहा है

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह!निशब्द करता आपका सृजन आदरणीय दी .
    सब की बोलती बंद है इन दिनों,
    वक़्त बोल रहा है
    बड़ी ही ख़ामोशी से
    कोई बहस नहीं,
    ना ही कोई,
    सुनवाई होती है
    एक इशारा होता है
    और पूरी क़ायनात उस पर
    अमल करती है!!!..वाह!

    जवाब देंहटाएं
  5. सच कहा अहि .... सबकी डोर ऊपर वाले के हाथ है ...
    जो २०२० से गुज़र रहा है वो तो नहीं भूलेगा कभी ...

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....