शनिवार, 5 अगस्त 2017

दोस्ती का बंधन भी !!!

कुछ रिश्ते
होते हैं प्रगाढ़
जिनकी रगों में
नहीं दौड़ता रक्त
आपसी सम्बन्धों का
बस बन्धन होता है
मन का मन से !
...
कुछ रिश्तों की
बात होती है अनोखी
ज़िक्र होता है इनका
जब भी
तो होता है एहसास
ये रूहानी रिश्ते हैं
दूरियाँ इन्हें क्या बांटेंगी !
दोस्ती का बंधन भी
कुछ ऐसा ही एहसास देता है !!!!
...

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (07-08-2017) को "निश्छल पावन प्यार" (चर्चा अंक 2698 पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    बाई-बहन के पावन प्रें के प्रतीक हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " 'बंगाल का निर्माता' की ९२ वीं पुण्यतिथि “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर और सटीक अभिव्यक्ति...

    उत्तर देंहटाएं

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मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....