शनिवार, 28 जनवरी 2012

कुछ तो गलत है ...














इंसाफ़ होने में देर हो तो
अंदेशा होता है अंधेर का
ज़रूर कहीं न कहीं
कुछ तो गलत है ...
''जागते रहो'' की
आवाज़ लगाता सुरक्षा प्रहरी
अनभिज्ञ रहता है
इस बात से कि
दबे पॉंव आकर पीछे से कोई
उसे हमेशा-हमेशा के लिए
चिरनिद्रा में सुला देगा
फिर भी वह
अपने कर्तव्‍य से
विमुख नहीं होता  ...
लेकिन भ्रष्‍टाचार की खाद पड़ी हो जहां
वहां बिन पानी भी
अपराध की असली जड़
हमेशा हरी रहती है
क्‍यूँकि उसका प्रतिफल
भुगतने के लिए
टहनियॉं सदैव लचीली रहती हैं
और पत्तियॉं इतनी नाजुक  व नरम होती हैं
कि कभी भी
आवश्‍यकता पड़ने पर
बिना किसी आवाज के
कटाई-छंटाई हो जाती है
और किसी को
कानो-कान खब़र नहीं होती ....

28 टिप्‍पणियां:

  1. उम्दा प्रस्तुति…………बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें।

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  2. अच्छी प्रस्तुति..
    सार्थक विषय..
    माँ सरस्वती की कृपा बनी रहे आप पर...
    शुभकामनाएँ.

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  3. बहुत ही बढ़िया ।

    बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।


    सादर

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  4. आशीष बरस रहा है आज माँ सरस्वती का ...
    बहुत सुंदर लिखा है ...
    शुभकामनायें ....

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  5. 'जागते रहो'' की
    आवाज़ लगाता सुरक्षा प्रहरी
    अनभिज्ञ रहता है
    इस बात से कि
    दबे पॉंव आकर पीछे से कोई
    उसे हमेशा-हमेशा के लिए
    चिरनिद्रा में सुला देगा .....

    इन पंक्तियों के साथ कविता बहुत अच्छी लगी....

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  6. बहुत खुबसूरत....जय माँ सरस्वती.....

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  7. और पत्तियॉं इतनी नाजुक व नरम होती हैं
    कि कभी भी
    आवश्‍यकता पड़ने पर
    बिना किसी आवाज के
    कटाई-छंटाई हो जाती है
    और किसी को
    कानो-कान खब़र नहीं होती ....

    Bahut samvedansheel rachana....bilkul sahee kah rahee hain aap!

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  8. खटकते रहना ही जागते रहने का परिचायक है।

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  9. देर होती है तो अंधेर का ही डर रहता है ..बहुत सच्ची रचना ..

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  10. वाह.......जबरदस्त |

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  11. जागते रहो कहनेवाला खुद ही संशय के घेरे में होता है !

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  12. टहनियॉं सदैव लचीली रहती हैं
    और पत्तियॉं इतनी नाजुक व नरम होती हैं
    कि कभी भी
    आवश्‍यकता पड़ने पर
    बिना किसी आवाज के
    कटाई-छंटाई हो जाती है
    और किसी को
    कानो-कान खब़र नहीं होती ....bahut sunder line...

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  13. सच कहा है कभी कभी खुद को ही पता नहीं चलता ... लाजवाब अभिव्यक्ति है ...

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  14. बहुत सुन्दर।
    आज सरस्वती पूजा निराला जयन्ती
    और नज़ीर अकबारबादी का भी जन्मदिवस है।
    बसन्त पञ्चमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  15. वैसे तो न्याय में देरी अपने आप में अन्याय है लेकिन जिस टूटी व्यवस्था की आपने बात की है वह सब के लिए चिंता का कारण है. जागते रहना ही होगा. चेताने वाली सुंदर कविता.

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  16. किसी नवजीवन का आना ही ...सृजन हैं

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  17. बहुत सही बात! सुन्दर रचना!

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  18. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति
    आज चर्चा मंच पर देखी |
    बहुत बहुत बधाई ||

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  19. इंसाफ़ होने में देर हो तो
    अंदेशा होता है अंधेर का
    ज़रूर कहीं न कहीं
    कुछ तो गलत है
    एकदम वास्तविक और सटीक रचना है.

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  20. ब्लॉग बुलेटिन पर की है मैंने अपनी पहली ब्लॉग चर्चा, इसमें आपकी पोस्ट भी सम्मिलित की गई है. आपसे मेरे इस पहले प्रयास की समीक्षा का अनुरोध है.

    स्वास्थ्य पर आधारित मेरा पहला ब्लॉग बुलेटिन - शाहनवाज़

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  21. बहुत सही बात कहती सुंदर रचना ....

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  22. प्रशंसनीय बहुत अच्छी लगी आपकी यह भावपूर्ण प्रस्तुति....!

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