सोमवार, 30 जनवरी 2012

जो लोग जिन्‍दगी को जी लेते हैं .....














तुम्‍हें संवारना आता है
हर बात को बनाना आता है
टूटी-फूटी चीज को भी
तुम दे देती हो एक नया आकार ...
दिशाओं के मार्ग
तुम्‍हारे एक कदम बढ़ाने से
प्रशस्‍त हो जाते हैं
और मंजिल के लिए राह
अपने आप बन जाती है ...
सोचती हूं मैं कई बार आखिर
ये हौसला ... ये उम्‍मीद
तुम तक पहुंचने से पहले कहां गुम थे
मेरी सोच को तुम
पढ़ लेती हो मेरे चेहरे पर
जानती हो क्‍यूं ?
क्‍योंकि तुम्‍हें जिन्‍दगी को जीना आता है
जो लोग जिन्‍दगी को जी लेते हैं
सच कहूं तो वह वंदनीय हो जाते हैं
बिल्‍कुल तुम्‍हारी तरह
ये हंसी क्‍यों ...
मेरी बातों पर भरोसा नहीं क्‍या ...
अरे यह सच है
कई बार पढ़ी हैं तुम्‍हारी आंखे मैने
जिनमें सपने तैरते हैं
हंसी के चिराग से जलते हैं
उम्‍मीदों के  साये लहराते हैं
जितना कोई तुम्‍हारे रास्‍ते में कांटे बिछाता है
तुम उतनी ही जिंदादिली से
अपने कदम वहां रख देती हो ...
जिन्‍दगी के इस सफ़र  में
जहां सन्‍नाटा भी तुमसे बात कर लेता है
खामोशी भी तुम्‍हें पाकर बोल उठती है
और मायूसी भी खिलखिलाती
वीराने में भी बहार आ जाती है
सपने तुम्‍हारे आगे हकी़कत हो जाते हैं
शब्‍द मुखर हो जाते हैं
तुम हो जाती हो अहसासों की एक
बेमिसाल कविता
जिसे हर कोई गुनगुनाना चाहता है
गीत की तरह ...

32 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर...
    जिंदादिली से जीने वालों की राह के काटें खुद-ब-खूब फूल बन जाते हैं..

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  2. वाह वाह वाह्………बेहद खूबसूरत अहसासों से लबरेज़्।

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  3. bahut hi sundar ....ek rah ek path ban jati hai kuch jindagiyan ....so sine ....

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  4. सुन्दर अभिव्यक्ति ..
    kalamdaan.blogspot.com

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  5. log ulajhte rahte hein
    kaamnaaon ke jangal mein bhatakte rahte hein
    nirantar rote rahte hein
    जो लोग जिन्‍दगी को जी लेते हैं
    सच कहूं तो वह वंदनीय हो जाते हैं
    bahu.............t badhiyaa

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  6. Aap bahut achha likhtee hain....mere paas tippanee karne ke liye alfaaz nahee hote!

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  7. कई बार पढ़ी हैं तुम्‍हारी आंखे मैने
    जिनमें सपने तैरते हैं
    हंसी के चिराग से जलते हैं
    उम्‍मीदों के साये लहराते हैं
    जितना कोई तुम्‍हारे रास्‍ते में कांटे बिछाता है
    तुम उतनी ही जिंदादिली से
    अपने कदम वहां रख देती हो ...

    प्रेरणादायक पंक्तियाँ .. बहुत खूबसूरत एहसास .

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  8. वाह सदा दी
    बेह्द खूबसूरत दिल मे उतर जाने वाली रचना……………सुन्दर भाव संयोजन्।

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  9. तुम हो जाती हो अहसासों की एक
    बेमिसाल कविता
    जिसे हर कोई गुनगुनाना चाहता है
    गीत की तरह ...
    ...........दिल में गहरे उतर जानेवाली

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  10. बेहतरीन अहसासों की सुंदर प्रस्तुति,सदा जी,..वाह!!!!!बहुत लाजबाब रचना,...

    welcome to new post ...काव्यान्जलि....

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  11. तारीफ करूँ ? ... तारीफ से ऊपर लिख दिया है तो अब क्या करूँ ?

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  12. कविता अपने मूल में,सचमुच ऐसी ही होती है।

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  13. बहुत सुन्दर सार्थक रचना। धन्यवाद।

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  14. क्‍योंकि तुम्‍हें जिन्‍दगी को जीना आता है

    वाह जी जिंदगी को जीना आ गया तो जिंदगी सफल है, बधाई।

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  15. बहुत सुन्दर पोस्ट|

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  16. कोमल एहसास के साथ ही सुन्दर रचना ...

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  17. जिन्दादिली से जीना ही तो जिन्दगी है...

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  18. जितना कोई तुम्‍हारे रास्‍ते में कांटे बिछाता है
    तुम उतनी ही जिंदादिली से
    अपने कदम वहां रख देती हो ...
    जिन्‍दगी के इस सफ़र में
    जहां सन्‍नाटा भी तुमसे बात कर लेता है
    खामोशी भी तुम्‍हें पाकर बोल उठती है
    और मायूसी भी खिलखिलाती
    वीराने में भी बहार आ जाती है
    जीवट जिंदादिली से भरपूर रचना .

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  19. जिन्दादिली कानाम ही जिन्दगी है...बहुत ही बढ़िया।

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  20. बहुत अच्छी बात कही है सदा जी आपने,
    जिन्दादिली से जिए तो हर पल हर लम्हा खुबसूरत होता है
    वीराने में भी बहार आती है ..
    शब्द शब्द खुबसूरत अहसास दिलाते है ..

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  21. जहां सन्‍नाटा भी तुमसे बात कर लेता है
    खामोशी भी तुम्‍हें पाकर बोल उठती है
    और मायूसी भी खिलखिलाती
    वीराने में भी बहार आ जाती है
    सपने तुम्‍हारे आगे हकी़कत हो जाते हैं
    शब्‍द मुखर हो जाते हैं
    तुम हो जाती हो अहसासों की एक
    बेमिसाल कविता.

    कमाल की प्रस्तुति. दिलके सारे भाव कविता में दिख रहे हैं.

    बधाई.

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  22. //जो लोग जिन्‍दगी को जी लेते हैं
    सच कहूं तो वह वंदनीय हो जाते हैं

    bahut sateek baat kahi hai..
    bahut sundar rachna.. :)

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  23. यह एक सनातन अनुभूति है कि पुरुष को लगता है कि स्त्री को जीवन जीना आता है और वह उसमें आश्रय ढूँढता है. आपकी कविता उसी भाव के विभिन्न रंगों को कोमल क्षणों में बाँधती चलती है. बहुत सुंदर.

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  24. जिन्‍दगी के इस सफ़र में
    जहां सन्‍नाटा भी तुमसे बात कर लेता है
    खामोशी भी तुम्‍हें पाकर बोल उठती है
    और मायूसी भी खिलखिलाती
    वीराने में भी बहार आ जाती है

    क्या शब्द पिरोये हैं आपने अपनी रचना में भाई वाह...कमाल कर दिया

    नीरज

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  25. तुम्‍हें संवारना आता है
    हर बात को बनाना आता है
    टूटी-फूटी चीज को भी
    तुम दे देती हो एक नया आकार .......बेहद खूबसूरत शब्द रचना ..निशब्द कर दिया आपने ........

    निराकार को आकार देना ,एक जीवन देना ही इस नारी का कर्म और धर्म बन जाता हैं ...जब वो किसी के शब्दों में ..उसकी आँखों में अपने लिए ऐसा आदर देखती हैं तो अपना पूर्ण जीवन हार जाती हैं उसके आगे

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  26. जिन्‍दगी के इस सफ़र में
    जहां सन्‍नाटा भी तुमसे बात कर लेता है
    खामोशी भी तुम्‍हें पाकर बोल उठती है
    और मायूसी भी खिलखिलाती
    वीराने में भी बहार आ जाती है
    सपने तुम्‍हारे आगे हकी़कत हो जाते हैं
    शब्‍द मुखर हो जाते हैं
    तुम हो जाती हो अहसासों की एक
    बेमिसाल कविता
    जिसे हर कोई गुनगुनाना चाहता है
    गीत की तरह ... वाह वाह ,बहुत सुंदर गहन अभिव्यक्ति सदा जी बहुत खूब ...

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