शुक्रवार, 20 जनवरी 2012

चुप्‍पी के तट पर .....

मौन बिना खुद से मिलना
संभव ही नहीं
कुछ कहना हो जब
खुद से कुछ सुननी हों बातें दिल की
तो उतर जाना
तुम शब्‍दों की नाव से
लगा देना किनारे इसे चुप्‍पी के तट पर
चलना फिर शांत चित्‍त से
जहां बंद दरवाजा खुल जाएगा
अंधेरे में दिया ज्ञान का जल जाएगा  ...
खुद से कहना हो जब कुछ तो
बस मौन ही सब कुछ कहता है
शब्‍द थोथे हो जाते हैं
भाषा गौण हो जाती है
संवेदनाएं सिमट जाती हैं
रूह के अंक में
चित्‍त एक थपकी मौन की
पाकर कह उठता है
सारी व्‍यथा ... सोचो तो तुम
गर्भ में थे मौन ही
मृत्‍यु पाकर भी मौन हो जाता है मनुष्‍य
शब्‍द तो बस बीच का खेल रह जाता है
शोरगुल के बीच खुद से दूर होकर
तुमने सोचा है कभी
हम उन्‍हीं शब्‍दों को रोज़ रटते रहते हैं
कुछ नया नही है
हम वही सब दुहराते हैं जो
सदियों से दुहराया जा रहा है
हम वही कह रहे हैं
जो सुनते आ रहे हैं जन्‍म के साथ
शब्‍द जरूरी हैं
क्‍योंकि इनके सिवा हमने
कुछ सीखा ही नहीं है
रिश्‍ते शब्‍दों के संसार शब्‍दों का
इनके बिना हमारा आपका  होना
सार्थक नहीं क्‍यूँ कि माध्‍यम तो यही है
शब्‍दों के बिना हमारा ज्ञान
हमारा पांडित्‍य सब शून्‍य हो जाता है
कुछ कहने का मतलब यह तो नहीं कि
खुद को भूल जाओ
अपने लिए भी वक्‍त निकालो
रूहानी बातों को सुनने के लिए
खुद को पहचानने के लिए
तुम्‍हें आवश्‍यकता है तो सिर्फ मौन की ...
कहीं पढ़ा भी था कुछ समय पहले
चुप होना सबसे बड़ी कला है
बाकी सारी कलाएं शब्‍दों पर निर्भर करती हैं ...

44 टिप्‍पणियां:

  1. शब्दों के साथ लंबा जीवन जीने के बाद मौन की कला सीखना कठिन ही होता है. परंतु है तो यह भी सीखने योग्य. सुंदर सृजन.

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  2. चुप होना सबसे बड़ी कला है
    बाकी सारी कलाएं शब्‍दों पर निर्भर करती हैं ...

    bahut sunder bhav aur abhivyakti bhi ....

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  3. जब शब्द कम पड़ जाते हैं तो मौन का ही सहारा लेना पड़ता है...कुछ ना कह के भी सब कुछ कह डालती है आपकी कविता

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  4. चुप होना सबसे बड़ी कला है
    बाकी सारी कलाएं शब्‍दों पर निर्भर करती हैं ...
    Maun sirf kala hee nahee,ek sadhana hai!

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  5. खुद से पहचान के लिए मौन ज़रुरी है ..खूबसूरत अभिव्यक्ति

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  6. बहुत सुन्दर सदा...
    अब कुछ कहूँगी तो लगेगा कि समझी नहीं तुम्हारी कविता!!!!
    सस्नेह.

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  7. aapki kavitaye sochne ko majboor karati hain.....aap kafi achchha likhati hain..

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  8. मौन मे ही आत्मबोध छुपा है।

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  9. चुपी को भी शब्द मिल गए है....... खुबसूरत अभिवयक्ति......

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  10. चुप होना सबसे बड़ी कला है
    बाकी सारी कलाएं शब्‍दों पर निर्भर करती हैं

    bahut badhiyaa ,
    par kab tak chup rahnaa ,kab bolnaa chaahiye jaannaa bhee zarooree hai ,

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  11. शब्द नहीं है इस मौन का अनुसरण करने को..........बेहतरीन, लाजवाब, शानदार.............हैट्स ऑफ इस पोस्ट के लिए|

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  12. बेहतरीन और गजब की कविता।

    सादर

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  13. चुप होना सबसे बड़ी कला है
    बाकी सारी कलाएं शब्‍दों पर निर्भर करती हैं .

    बेहतरीन अभिव्यक्ति ..

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  14. सच है चुप रहना एक बड़ी ही नहीं एक मुश्किल कला है..सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

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  15. मौन अत्यन्त प्रभावी है, स्वयं को समझने के लिये।

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  16. मौनी अमावस्या के पूर्व लाज़वाब पोस्ट।

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  17. आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है नयी पुरानी हलचल पर कल शनिवार 21/1/2012 को। कृपया पधारें और अपने अनमोल विचार ज़रूर दें।

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  18. गर्भ में थे मौन ही
    मृत्‍यु पाकर भी मौन हो जाता है मनुष्‍य
    शब्‍द तो बस बीच का खेल रह जाता है

    Gahan Abhivykti....

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  19. बस मौन ही सब कुछ कहता है
    शब्‍द थोथे हो जाते हैं
    भाषा गौण हो जाती है
    संवेदनाएं सिमट जाती हैं
    रूह के अंक में

    बहुत सुन्दर

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  20. खामोशी वार्तालाप की महान कला है,सुंदर प्रस्तुति।

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  21. बुद्धि के रास्ते दिल से रूह को पहुँच खुद से परिचय करवाती सुंदर रचना। बधाई !

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  22. मृत्‍यु पाकर भी मौन हो जाता है मनुष्‍य,सुंदर रचना लाजबाब |

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  23. बस मौन ही सब कुछ कहता है
    शब्‍द थोथे हो जाते हैं
    भाषा गौण हो जाती है
    संवेदनाएं सिमट जाती हैं
    रूह के अंक में ....................वाह शानदार ...लाजवाब

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  24. अपने लिए भी वक्‍त निकालो
    रूहानी बातों को सुनने के लिए
    खुद को पहचानने के लिए............बिलकुल सही कहा ..सदा!!!

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  25. चुप होना सबसे बड़ी कला है
    बाकी सारी कलाएं शब्‍दों पर निर्भर करती हैं ....wah bahut khoob
    sarthak rachna :)

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  26. अपने लिए भी वक्‍त निकालो
    रूहानी बातों को सुनने के लिए
    खुद को पहचानने के लिए
    तुम्‍हें आवश्‍यकता है तो सिर्फ मौन की .

    Atm chintan ke liye vivash karati hui rachana ......bahut prabhavshali .......badhai ke sath abhar sweekaren Sada ji.

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  27. बस मौन ही सब कुछ कहता है
    शब्‍द थोथे हो जाते हैं
    भाषा गौण हो जाती है
    संवेदनाएं सिमट जाती हैं.

    आत्म चिंतन जरूरी है. सुंदर प्रस्तुति.

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  28. मौन दरअसल मौन कहाँ रह जाता है ... वो तो मुखर हो कर बोलता है ... अपने आपसे तो हमेशा बोलता है ...

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  29. मौन में बहुत शक्ति होती है.इसी कारण पहुँचे हुए संत महात्मा बहुत कम बात करते हैं.

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  30. मौन बिना खुद से मिलना संभव ही नहीं| सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति| धन्यवाद।

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  31. खुद से पहचान के लिए मौन ज़रूरी है गहन चिंतन से युक्त बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

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  32. sach hai maun ke liye shabd nahin bas samvedna zaroori hai...bahut sundar rachna, badhai.

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  33. निःशब्दता और भी ज्यादा मुखर होती है......

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  34. चित्‍त एक थपकी मौन की
    पाकर कह उठता है
    सारी व्‍यथा ... सोचो तो तुम.bahhhhut khub sada jee.

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  35. आपके इस उत्‍कृष्‍ट लेखन के लिए आभार ।

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  36. चुप होना सबसे बड़ी कला है
    बाकी सारी कलाएं शब्‍दों पर निर्भर करती हैं ...

    ....बिलकुल सच ..मौन की भी एक अनुपम भाषा होती है..बहुत सुन्दर

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  37. मौन की खूबी बताती बहुत ही अच्‍छी कवि‍ता।

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  38. मौन की सार्थकता बताती खूबसूरत रचना..

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  39. बहुत सुंदर प्रस्तुति,भावपूर्ण अच्छी रचना,..
    WELCOME TO NEW POST --26 जनवरी आया है....
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए.....

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