मंगलवार, 28 अप्रैल 2009

देते रहे दस्तक वारिसशाह . . .

तेरी रूह जाने किस तन में जा समाई होगी,
अब भी शायद मन में कविता ही छाई होगी ।

तेरी कलम से निकला हर शब्द अमिट हो गया,
हर शब्द की चाहत में सिर्फ़ तू ही समाई होगी ।

कितनी नज्में लिखी कवियों ने याद में तेरी,
जाने कितनो ने अपनी महफिलें सजाई होगी ।

कोरे कागज पे रंग भरते तेरे अल्फाज़ जिनमें,
डूब के तूने रंगत ये निखरी हुई सी पाई होगी ।

तेरे ख्वाबों में "सदा" देते रहे दस्तक वारिसशाह,
किसी के ख्वाबों में अमृता तू भी तो आई होगी ।


4 टिप्‍पणियां:

  1. waah bahut hi sunder
    कोरे कागज पे रंग भरते तेरे अल्फाज़ जिनमें,
    डूब के तूने रंगत ये निखरी हुई सी पाई होगी ।

    तेरे ख्वाबों में "सदा" देते रहे दस्तक वारिसशाह,
    किसी के ख्वाबों में अमृता तू भी तो आई होगी ।

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  2. बहुत ही खूबसूरत गजल कही है आपने, बधाई।
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    TSALIIM.
    -SBA-

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  3. तेरे ख्वाबों में "सदा" देते रहे दस्तक वारिसशाह,
    किसी के ख्वाबों में अमृता तू भी तो आई होगी ।

    बहुत खूब बहुत सुन्दर ..

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