SADA
शनिवार, 20 जून 2015

पापा की हथेलियों में ...

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पापा की हथेलियों में होते मेरे दोनो बाजू और मैं होती हवा में तो बिल्‍कुल तितली हो जाती खिलखिलाकर कहती पापा और ऊपर हँसते पापा...
13 टिप्‍पणियां:
रविवार, 31 मई 2015

इन जिदों की मनमानी!!!!

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कुछ जि़दों में से एक को आज मैने बाँध दिया है ओखल डोरी से और बंद कर दिया है मन के अँधेरे कमरे में सोचा है अब नहीं जाऊँगी पा...
16 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 9 मई 2015

सिर्फ माँ ही !!!

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माँ ने नहीं पढ़े होते नियम क़ायदे ना ही ली होती है डिग्री कोई कानून की फिर भी हर लम्‍हा सज़ग रहती है अपने बच्‍...
10 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 30 अप्रैल 2015

मंजिलों के रास्‍ते!!!

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कर्तव्य की कोई भी राह लो उस पर चलते जाने की शपथ तुम्‍हें स्‍वयं लेनी होगी राहें सुनसान भी होंगी कोशिशें नाक़ाम भी होंगी पर मंजिल...
7 टिप्‍पणियां:
रविवार, 29 मार्च 2015

किसी और की खुशी में!!!!

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खुशियों को जब भी देखा मैने नये परिधान में सोचा ज़रूर ये आज किसी की हो जाने के लिये तैयार हुई हैं! ... बस उनके आग़त का स्‍वाग...
16 टिप्‍पणियां:
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सदा
मन को छू लें वो शब्‍द अच्‍छे लगते हैं, उन शब्‍दों के भाव जोड़ देते हैं अंजान होने के बाद भी एक दूसरे को सदा के लिए .....
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