शनिवार, 20 जून 2015
पापा की हथेलियों में ...
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पापा की हथेलियों में होते मेरे दोनो बाजू और मैं होती हवा में तो बिल्कुल तितली हो जाती खिलखिलाकर कहती पापा और ऊपर हँसते पापा...
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रविवार, 31 मई 2015
इन जिदों की मनमानी!!!!
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कुछ जि़दों में से एक को आज मैने बाँध दिया है ओखल डोरी से और बंद कर दिया है मन के अँधेरे कमरे में सोचा है अब नहीं जाऊँगी पा...
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शनिवार, 9 मई 2015
सिर्फ माँ ही !!!
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माँ ने नहीं पढ़े होते नियम क़ायदे ना ही ली होती है डिग्री कोई कानून की फिर भी हर लम्हा सज़ग रहती है अपने बच्...
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गुरुवार, 30 अप्रैल 2015
मंजिलों के रास्ते!!!
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कर्तव्य की कोई भी राह लो उस पर चलते जाने की शपथ तुम्हें स्वयं लेनी होगी राहें सुनसान भी होंगी कोशिशें नाक़ाम भी होंगी पर मंजिल...
7 टिप्पणियां:
रविवार, 29 मार्च 2015
किसी और की खुशी में!!!!
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खुशियों को जब भी देखा मैने नये परिधान में सोचा ज़रूर ये आज किसी की हो जाने के लिये तैयार हुई हैं! ... बस उनके आग़त का स्वाग...
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