रविवार, 22 अगस्त 2021

पावन सी दुआ !!!

 स्मृतियां आने से पहले

नहीं देती दस्तक़

वरना मैं आपको आज भी

हँसती हुई मिलती पापा

बना रही हूँ 

मीठी सिवइयां

इनके बिना फीका लगता था

आपको हर त्यौहार 

नेह के बन्धनों में बंधे हम

विस्मृत नहीं होते 

कभी इन स्मृतियों से !

अक्षत से रोली

हँस के बोली 

तुम भी मेरे भाई के माथे पर 

सितारों से चमकते हो

मेरे रतनारी रँग पर

पावन सी दुआ बनते हो

इस विश्वास के साथ कि

मेरे भाई की कोई क्षति नहीं होगी

धागा नेह का

बंध के कलाई पर 

अडिगता से निभाता है वचन

पवित्र रिश्ते का 

सम्मान के संग !!

...




19 टिप्‍पणियां:

  1. पिता की याद के साथ भाई के माथे पर लगा तिलक और नेह के धागे में बुना पवित्र रिश्ता सम्मान बनाये रखता है । सुंदर भावाभिव्यक्ति ।

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  2. आपकी लिखी रचना सोमवार 23 ,अगस्त 2021 को साझा की गई है ,
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    संगीता स्वरूप

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  3. बेहद पवित्र और गंगाजल सी छलकती भावनाएँ।
    बेहतरीन भावपूर्ण सृजन दी।

    सस्नेह
    सादर।

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  4. बहुत ही सुंदर हृदयस्पर्शी सृजन आदरणीया दी।
    सादर

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  5. अति पावन भावाभिव्यक्ति ।

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  6. अक्षत से रोली

    हँस के बोली

    तुम भी मेरे भाई के माथे पर

    सितारों से चमकते हो
    सचमुच बहुत ही पावन दुआ ....पा की यादों संग पावन पर्व।
    हृदयस्पर्शी सृजन।

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  7. मन को छू गई आपकी रचना और उसके भाव ...
    बेरी पिता को याद करना नहीं भूलती किसी भी क्षण में ...

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