मंगलवार, 29 जुलाई 2014

इश्‍क़ की किताबों में!!!!!









किसी सफ़े पे थी
खिलखिलाती याद उसकी
किसी सफ़े पे था
उसकी मुस्‍कराहटों का पहरा
इश्‍क़ की किताबों में
करवटें बदलती रूहों का जागना
उंगलियों के पोरों की छुँअन से
फिर कहना उनका हौले-हौले से
मुहब्‍बत के नर्म एहसासों का होता
पलकें कई बार
झपकना भूल ही जाती थीं
कई बार लगता
निकलकर इनमें से कुछ एहसासों ने
घेरा बना लिया है
मेरे इर्द-गिर्द औ’ कहा था
अपने हिस्‍से का सच तो
जाना था मैने उन्‍हें
कुछ यूँ भी ...
...
सच मुहब्‍बत कभी
मरकर भी मरती नहीं
दूर होकर भी बिछड़ती नहीं
दिलों से दिलों का ये रिश्‍ता
जिंदा रहता है
रूहें जो सफ़र में रहती हैं
ताउम्र अपनी !!!!!
___



27 टिप्‍पणियां:

  1. आपके नज़्म ने खूबसूरत एहसास जगाये। इस पंक्ति में कुछ कमी नज़र आ रही है.. मुहब्‍बत के नर्म एहसासों का होता।

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  2. रूहानी सी मुहब्बत . बहुत खूबसूरत नज़्म

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  3. जाने कैसी कशिश है इस नज़्म में....शब्दों और भावों का बेजोड़ संगम

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  4. आपकी कविता हमेशा दो हिस्सों में हुआ करती है... पहला भाग जहाँ मन की बात कहता है, दूसरा भाग वहीं उस बात का मतलब समझाता है.. एहसासों को महसूस करना और उनको प्रकट करना दो अलग-अलग बातें हैं, लेकिन आपकी कविता में इन दोनों का शानदार फ्यूज़न दिखाई देता है!!

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  5. आपकी लिखी रचना बुधवार 30 जुलाई 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  6. मुहब्बत की यही सच्चाई है
    सुन्दर अहसास लिए रचना !

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  7. बहुत ताज़गी से भरे एहसास और उतनी ही खूबसूरत अभिव्यक्ति !

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  8. पलकें कई बार
    झपकना भूल ही जाती थीं
    कई बार लगता
    निकलकर इनमें से कुछ एहसासों ने
    घेरा बना लिया है
    बहुत खूबसूरत

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  9. सच मुहब्‍बत कभी
    मरकर भी मरती नहीं
    दूर होकर भी बिछड़ती नहीं
    दिलों से दिलों का ये रिश्‍ता
    जिंदा रहता है
    रूहें जो सफ़र में रहती हैं
    ताउम्र अपनी
    बहुत खूब

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  10. बहुत सुंदर...दास्ताँ मुहब्बत की...

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  11. रूहें जो सफ़र में रहती हैं ! अनवरत सफ़र में मुहब्बत भी चलती है साथ उसके!
    खूब !

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  12. उंगलियों के पोरों की छुँअन से
    फिर कहना उनका हौले-हौले से
    मुहब्‍बत के नर्म एहसासों का होता
    बहुत ही खुबसूरत अभिव्यक्ति

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  13. बहुत खूब .... मुहब्बत रहती है श्रृष्टि के रहने तक ...
    ढूंढ लेती है मुहब्बत का घर हमेशा ...

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  14. सच मुहब्‍बत कभी
    मरकर भी मरती नहीं
    दूर होकर भी बिछड़ती नहीं
    दिलों से दिलों का ये रिश्‍ता
    जिंदा रहता है
    रूहें जो सफ़र में रहती हैं
    ताउम्र अपनी !!!!!

    बेहद सकारात्मक सोच की झलक.........

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  15. sach kaha ki मुहब्‍बत कभी
    मरकर भी मरती नहीं

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  16. मन को छूती अभिव्यक्ति
    वाह !!! बहुत सुन्दर रचना ----

    सादर ---

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  17. दिलों से दिलों का ये रिश्‍ता
    जिंदा रहता है
    रूहें जो सफ़र में रहती हैं
    ताउम्र अपनी !!!!!
    ...बिल्कुल सच...दिल को छूते अहसास...बहुत सुन्दर

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