रविवार, 6 जुलाई 2014

फ़रेब की स्‍लेट पर !!!

जब भी मेरी उम्मीद
टूटकर मिलती तो बस
इतना ही कहती तुम जीने के लिये
किसी की उम्मीद बन जाना
कुछ मुश्किल तो होगा
पर तुम्हे जीना आ जाएगा !!!
....
सहानुभूति के शब्‍द
अक्‍़सर फ़रेब की स्‍लेट पर
लिखे जाते हैं
जहाँ सच बात को
बेर्इमानी के छींटे डालकर
मिटा दिया गया होता है
बड़ी ही सफ़ाई से !!!
.....
सच की ताकत
रूहों को पाक़ रखती है
तभी तो 
जब भी ज़मीर जागता है
सच की प़नाह लेता है !!!


18 टिप्‍पणियां:

  1. सहानुभूति के शब्‍द
    अक्‍़सर फ़रेब की स्‍लेट पर
    लिखे जाते हैं

    तभी कहते है न ...सहानुभूति जताने और साथ देने में अंतर होता है.... सुन्दर रचना

    जवाब देंहटाएं
  2. जीवन स्वयं ही जीना होता है ... सच कहा किसी को बैसाखी बनाने से टूटने का डर रहता है ...

    जवाब देंहटाएं
  3. जहाँ सच बात को
    बेर्इमानी के छींटे डालकर
    मिटा दिया गया होता है
    बड़ी ही सफ़ाई से !!! .........बहुत ही सटीक और सार्थक पंक्तियाँ.बधाई सदाजी..

    जवाब देंहटाएं
  4. ज़िन्दगी बहुत निराश करती है कई बार... लेकिन ज़िन्दगी इतनी भी बदसूरत नहीं! आपकी कविता दिल को छूती है हमेशा की तरह!!

    जवाब देंहटाएं
  5. जमीर जगता है तो सच की पनाह लेता है यही नहीं जमीर जगता ही तभी है जब सच की पनाह ली जाती है

    जवाब देंहटाएं
  6. अर्थपूर्ण एवं भावपूर्ण रचनाएँ, बधाई.

    जवाब देंहटाएं
  7. एक दम सही कहा....
    सहानुभूति के शब्‍द
    अक्‍़सर फ़रेब की स्‍लेट पर
    लिखे जाते हैं......................

    सस्नेह
    अनु

    जवाब देंहटाएं
  8. सच कहा सत्य की ताकत बहुत बड़ी है
    सुन्दर रचना के लिए बधाई

    जवाब देंहटाएं
  9. जब भी मेरी उम्मीद
    टूटकर मिलती तो बस
    इतना ही कहती तुम जीने के लिये
    किसी की उम्मीद बन जाना
    कुछ मुश्किल तो होगा
    पर तुम्हे जीना आ जाएगा !!!
    ...... just loved it :)

    जवाब देंहटाएं
  10. सच्चाई का आईना दिखती बहुत ही सुंदर सार्थक भावाभिव्यक्ति।

    जवाब देंहटाएं
  11. सहानुभूति के शब्‍द
    अक्‍़सर फ़रेब की स्‍लेट पर
    लिखे जाते हैं
    जहाँ सच बात को
    बेर्इमानी के छींटे डालकर
    मिटा दिया गया होता है
    बड़ी ही सफ़ाई से !!!
    .....
    सदा जी गंभीर रचना लाजबाब पोस्ट आभार के साथ बधाई ।

    जवाब देंहटाएं
  12. वाह! कितना लुभावना झूठा सच .......
    सहानुभूति के शब्‍द
    अक्‍़सर फ़रेब की स्‍लेट पर
    लिखे जाते हैं.......और सब पढ़ कर खुश हो जाते हैं .....???

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत ही सार्थक आलेख, सादर।

    जवाब देंहटाएं
  14. बहुत सुन्दर और सारगर्भित रचना...

    जवाब देंहटाएं
  15. सच की ताकत
    रूहों को पाक़ रखती है
    तभी तो
    जब भी ज़मीर जागता है
    सच की प़नाह लेता है !!!
    effective lines .

    जवाब देंहटाएं
  16. सहानुभूति के शब्द अक्सर फरेब की स्लेट पे ल्खे जाते हैं...

    बहुत खूब....

    जवाब देंहटाएं