गुरुवार, 8 नवंबर 2012

एक कदम हौसले का ...!!!













मुश्किलों में संभलना हो तो
हर मुश्किल पर उसका इस्‍तक़बाल करो
जब भी कभी ऊंचाईयों से डरा है मन,
एक कदम हौसले का धीरे से
सहमे हुये मन के पास आया है
और पूछा है
किस बात का डर
मैं हूँ न तुम्‍हारे साथ
घबराकर जब भी पलकों को बंद किया,
एक किरण रौशनी की
मेरी पलकों में समाई और
चमकते हुए कह उठी मेरे रहते
अंधकार कैसे संभव भला
मैने झट से अपनी
बंद पलको को खोला और
उस चमकती हुई रौशनी का
स्‍वागत किया
जहां हर दृश्‍य मन के संशय का
निराकरण करता नजर आया
......
एक अनंत शक्ति हमारे मन में
विश्‍वास के बीजों की
पोटली रख छोड़ती है
जिसे हम वक्‍त-बेवक्‍़त
बो दते हैं संयम की धरा पर
....
संयम की धरा
हमारे विश्‍वास के बीज को
अंकुरित कर पोषित करती है
ताकि हमारी आस्‍था
उस अनंत शक्ति पर सदैव बनी रहे !!!

35 टिप्‍पणियां:

  1. यथार्थ सत्य सदा दी परन्तु, मुस्किल की घड़ी में अक्सर संयम टूट जाता है।
    संयम की धरा
    हमारे विश्‍वास के बीज को
    अंकुरित कर पोषित करती है
    ताकि हमारी आस्‍था
    उस अनंत शक्ति पर सदैव बनी रहे

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  2. संयम की धरा
    हमारे विश्‍वास के बीज को
    अंकुरित कर पोषित करती है
    ताकि हमारी आस्‍था
    उस अनंत शक्ति पर सदैव बनी रहे !!!

    सच है...... यह विश्वास यूँ ही पोषित होता रहे

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  3. एक अनंत शक्ति हमारे मन में
    विश्‍वास के बीजों की
    पोटली रख छोड़ती है
    जिसे हम वक्‍त-बेवक्‍़त
    बो दते हैं संयम की धरा पर yah panktiyaan bahut pasand aayi ..bahut sundar

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  4. संयम की धरा
    हमारे विश्‍वास के बीज को
    अंकुरित कर पोषित करती है
    ताकि हमारी आस्‍था
    उस अनंत शक्ति पर सदैव बनी रहे !!!

    ये धारा यूँ ही बहती रहे

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  5. संयम की धरा
    हमारे विश्‍वास के बीज को
    अंकुरित कर पोषित करती है
    ताकि हमारी आस्‍था
    उस अनंत शक्ति पर सदैव बनी रहे !!!

    बहुत सुंदर
    क्या बात है..

    जवाब देंहटाएं
  6. एक किरण रौशनी की
    मेरी पलकों में समाई और
    चमकते हुए कह उठी मेरे रहते
    अंधकार कैसे संभव भला
    मैने झट से अपनी
    बंद पलको को खोला और
    उस चमकती हुई रौशनी का
    स्‍वागत किया
    जहां हर दृश्‍य मन के संशय का
    निराकरण करता नजर आया
    ......
    एक अनंत शक्ति हमारे मन में
    विश्‍वास के बीजों की
    पोटली रख छोड़ती है
    जिसे हम वक्‍त-बेवक्‍़त
    बो दते हैं संयम की धरा पर

    (पलकों को खोला , बो देते हैं )

    बहुत खूब रचना लिखी है सकारात्मक ऊर्जा संजोती हर पल .....हमें उन राहों पर चलना है जहां गिरना और संभलना है ,हम हैं वो दीये औरों के लिए जिन्हें तूफानों में पल ना है .

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  7. अंकुरित कर पोषित करती है
    ताकि हमारी आस्‍था
    उस अनंत शक्ति पर सदैव बनी रहे !!!
    ....बहुत अच्छी रचना है...एक संदेश दे रही है !

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  8. संयम अखूट निधि है।

    संयम की धरा
    हमारे विश्‍वास के बीज को
    अंकुरित कर पोषित करती है
    ताकि हमारी आस्‍था
    उस अनंत शक्ति पर सदैव बनी रहे !!!

    जवाब देंहटाएं
  9. संयम की धरा
    हमारे विश्‍वास के बीज को
    अंकुरित कर पोषित करती है...
    ----------------------
    बहुत ही लाजवाब पंक्तियाँ

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  10. बहुत प्रेरक और सुंदर अभिव्यक्ति..

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  11. संयम की धरा
    हमारे विश्‍वास के बीज को
    अंकुरित कर पोषित करती है
    ताकि हमारी आस्‍था
    उस अनंत शक्ति पर सदैव बनी

    सुंदर अभिव्यक्ति शुभ कामना

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  12. जय हो ... :)


    क्यूँ कि तस्वीरें भी बोलती है - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  13. जीवन इस आस्था की नाजुक डोर पर ही दृढ़ता से टिका है !
    रौशनी की एक किरण के साथ आस जरुरी है !

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  14. बहुत सुन्दर लिखा है , बस चार पंक्तियाँ कहना चाहूँगा-
    “आकाश” के उस पार ,
    चलो घूमकर आते हैं |
    गहरा घुप्प अँधेरा है ,
    पर एक किरण झिलमिल सी है ,
    उसे उठाकर लाते हैं ||

    सादर

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  15. बहुत ही प्रेरक रचना | बहुत सुंदर |

    मेरी नई पोस्ट-बोलती आँखें

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  16. एक अनंत शक्ति हमारे मन में
    विश्‍वास के बीजों की
    पोटली रख छोड़ती है
    जिसे हम वक्‍त-बेवक्‍़त
    बो दते हैं संयम की धरा पर
    sach .. bahut sach..
    prerak!!

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  17. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 10/11/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  18. मुश्किलों का इस्तकबाल करो तो वे भी झुक जाती हैं .... रास्ते चलकर पास आते हैं

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  19. संयम की धरा
    हमारे विश्‍वास के बीज को
    अंकुरित कर पोषित करती है
    ताकि हमारी आस्‍था
    उस अनंत शक्ति पर सदैव बनी रहे !!!

    हौसला ही कदम दर कदम आगे बढ्ने को प्रेरित करता है ... सुंदर प्रस्तुति

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  20. बहुत ही प्रेरक रचना सदा जी
    मेरे ब्लॉग पर स्वागत है
    http://rajkumarchuhan.blogspot.in

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  21. संयम की धरा
    हमारे विश्‍वास के बीज को
    अंकुरित कर पोषित करती है
    ताकि हमारी आस्‍था
    उस अनंत शक्ति पर सदैव बनी रहे !!!

    ....यही आस्था तो जीवन का संबल है...बहुत सुंदर अभिव्यक्ति..

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  22. सुन्दर रचना । आभार ।
    मेरे नए पोस्ट "श्रद्धांजलि: संजीव कुमार " को भी एक बार अवश्य पढ़े । धन्यवाद
    मेरा ब्लॉग पता है :- http://gyaan-sansaar.blogspot.com

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  23. पूरी रचना का सार आपकी इन दो लाइंस में मौजूद है .....

    मुश्किलों में संभलना हो तो
    हर मुश्किल पर उसका इस्‍तक़बाल करो......

    दीवाली की शुभकामनायें!

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  24. सुन्दर, दार्शनिक, प्रेरणादायक अभिव्यक्ति
    सादर
    मधुरेश

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  25. संयम और आस्था उस परमात्मा के प्रति.. बहुत ही संतुलित तौर पर आपने हर पहलू को समा दिया है इस कविता में.. बहुत खूब!!

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  26. संयत रचना ...बहुत खूब


    दीवाली की बहुत बहुत शुभकामनाएँ

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  27. हिम्मतों से उड़ान होती है...सिर्फ पंख होने से कुछ नहीं होता...

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