सोमवार, 19 नवंबर 2012

ख्‍यालों की भीड़ में !!!










कभी खोये से ख्‍याल,
मिल जाते हैं जब
एक जगह तो सवाल करते हैं
अपने आप से ?
ऐसा क्‍यूँ है कोई आवाज उठाता
हक़ की कोई कहता
मेरी कद्र क्‍यूँ नहीं की ?
मैं हालातों का जिक्र करती
समझौते की जिन्‍दगी
कैसे जीनी होती है बतलाती
पर कहाँ सुनते वे मेरी !
....
कभी तेज़ हवाओं के बीच
तुम रहे हो ?
यदि हां तो कितने अस्‍त-व्‍यस्‍त
हो गये होगे
उन पलों के बीच
बस उसी तरह से आज
कुछ तेज ख्‍यालों के बीच में
मैं हूँ ! हर ख्‍याल
एक अपनी ही तेजी में है
मेरी कुछ सुनता ही नहीं
मैं सुनते-सुनते सबकी
अपनी कहना भूल ही गई
किस ख्‍याल का अभिनन्‍दन करूं
तो किस ख्‍याल के आगे
हो जाऊँ नतमस्‍तक
....
एक उलझन सी है जिसमें
कुछ ख्‍याल उलझ गये हैं
कुछ गुथे से हैं एक दूसरे में
अपनी मैं का मान लिए
सबके सम्‍मान में
खामोश सी मैं एक
नन्‍हें ख्‍याल की उँगली थाम
चली हूँ अभी - अभी
कहीं वो गुम न जाए
ख्‍यालों की भीड़ में !!!
.....

25 टिप्‍पणियां:

  1. मैं सुनते-सुनते सबकी
    अपनी कहना भूल ही गई
    किस ख्‍याल का अभिनन्‍दन करूं
    तो किस ख्‍याल के आगे
    हो जाऊँ नतमस्‍तक
    मैं निशब्द हूँ ,अपने मन के भाव देख कर !!

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  2. ख़यालों की भीड़ में एक खयाल की उंगली पकड़ चलना ही सार्थक है ... सुंदर रचना

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  3. एक उलझन सी है जिसमें
    कुछ ख्‍याल उलझ गये हैं
    कुछ गुथ से एक दूसरे में
    अपनी मैं का मान लिए
    सबके सम्‍मान में
    खामोश सी मैं एक
    नन्‍हें ख्‍याल की उँगली थाम
    चली हूँ अभी - अभी ............bahut sundar panktiyaan

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  4. अपनी मैं का मान लिए
    सबके सम्‍मान में
    खामोश सी मैं एक
    नन्‍हें ख्‍याल की उँगली थाम
    चली हूँ अभी - अभी
    कहीं वो गुम न जाए
    ख्‍यालों की भीड़ में !!!..........सुन्दर भावाभिव्यक्ति!

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  5. ख्यालों की पीर ख्यालों मे खो गयी

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  6. बहुत बढ़िया आदरेया ||

    समझौते की जिंदगी, अस्त व्यस्त शत-ख्याल |
    इक अलबेला ख्याल ले, चलती आज सँभाल ||

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  7. भगदड़ मची है ख्यालों की....
    एक दुसरे को रौंदते जा रहे हैं ख़याल...
    बहुत सुन्दर..

    सस्नेह
    अनु

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  8. आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार 20/11/12 को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका स्वागत है

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  9. उलझती राहों को सोचती सी ये छोटी सी जिंदगी

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  10. मूक हो गई में निसंदेह .............

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  11. नन्‍हें ख्‍याल की उँगली थाम
    चली हूँ अभी - अभी
    कहीं वो गुम न जाए
    ख्‍यालों की भीड़ में !!!निशब्द करती रचना,बहुत सुंदर,,,


    recent post...: अपने साये में जीने दो.

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  12. उम्दा प्रस्तुति शसक्त रचना गहरे भाव पिरोयें हैं सदा दीदी मज़ा आ गया.
    एक उलझन सी है जिसमें
    कुछ ख्‍याल उलझ गये हैं
    कुछ गुथे से हैं एक दूसरे में
    अपनी मैं का मान लिए
    सबके सम्‍मान में
    खामोश सी मैं एक
    नन्‍हें ख्‍याल की उँगली थाम
    चली हूँ अभी - अभी
    कहीं वो गुम न जाए
    ख्‍यालों की भीड़ में !!!

    जवाब देंहटाएं
  13. कितने ही ख्याल बिन बुलाये आ जाते हैं...नये ख्याल को ख्यालों की भीड़ में गुम होने से बचाके रखना बहुत ही दुरूह है...

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  14. मैं सुनते-सुनते सबकी
    अपनी कहना भूल ही गई

    हर लफ्ज़ एहसासों में भींगे हुए. सुन्दर रचना.

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  15. ख्यालों की भीड़ में कुछ खोये ख्याल मिल जाते हैं... वाह

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  16. आपकी इन पक्तियों ने मन के संवेदनशील तारों को झंकृत कर दिया। मेरे नए पोस्ट पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद।

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  17. बेहतरीन रचना वाह..... मैं सुनते-सुनते सबकी
    अपनी कहना भूल ही गई
    किस ख्‍याल का अभिनन्‍दन करूं
    तो किस ख्‍याल के आगे
    हो जाऊँ नतमस्‍तक

    जवाब देंहटाएं
  18. इन ख्‍यालों की भीड़ में,बेचारा दिल तन्हा
    रह गया !!!!
    शुभकामनायें!

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  19. एक उलझन सी है जिसमें
    कुछ ख्‍याल उलझ गये हैं
    कुछ गुथे से हैं एक दूसरे में (गुंथे से हैं एक दुसरे में )
    अपनी मैं का मान लिए
    सबके सम्‍मान में
    खामोश सी मैं एक
    नन्‍हें ख्‍याल की उँगली थाम
    चली हूँ अभी - अभी
    कहीं वो गुम न जाए
    ख्‍यालों की भीड़ में !!!

    बढ़िया एहसासात को संजोये हैं ये चंद पंक्तियाँ .

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  20. जो ख्याल इतनी सुंदर कविता का रूप अख्तियार कर लेते हैं वो अक्सर ख्यालों की भीड़ में नहीं खोते...सुन्दर रचना।।।

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  21. एक उलझन सी है जिसमें
    कुछ ख्‍याल उलझ गये हैं
    कुछ गुथे से हैं एक दूसरे में (गुंथे से हैं एक दूसरे में )
    अपनी मैं का मान लिए
    सबके सम्‍मान में
    खामोश सी मैं एक
    नन्‍हें ख्‍याल की उँगली थाम
    चली हूँ अभी - अभी
    कहीं वो गुम न जाए
    ख्‍यालों की भीड़ में !!!

    गुंथे शब्द ठीक करें कृपया ,देखिये मैंने ऊपर "दुसरे" का शुद्ध रूप दूसरे लिख दिया है यह गलती मुझसे हुई थी .गूंथना शब्द है .

    बढ़िया एहसासात को संजोये हैं ये चंद पंक्तियाँ .

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  22. कुछ ख्‍याल उलझ गये हैं
    कुछ गुथे से हैं एक दूसरे में
    अपनी मैं का मान लिए
    सबके सम्‍मान में
    खामोश सी मैं एक
    नन्‍हें ख्‍याल की उँगली थाम
    चली हूँ अभी - अभी

    बहुत खूबसूरत

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