मंगलवार, 16 अगस्त 2011

मां ...















मां ... के बारे में
बतलाऊंगी मैं तुमको
अपनी कविता में
तो मां नजर आएगी हर शब्‍द में
सबने जाने कितना कुछ
लिखा है पर मां पर ....

फिर भी अभी कुछ बाकी है
कुछ अधूरा है
मां ...कहने से आंखों में झलकता है
एक ममतामयी चेहरा
स्‍नेहिल आंखे
और धवल हंसी .....
मां ...एक सुकून है दिल का
एक ऐसा साया
जिसके होने से हम निश्चिंतता की चादर
तान कर सोते हैं
क्‍योंकि जानते हैं - मां जाग रही है
उसे हर पल की खबर होती है
बिना कुछ कहे वह
अन्‍तर्मन पढ़ लेती है
हमारी भूख हमारी प्‍यास का अहसास
हमसे ज्‍यादा मां को होता है
हमारी व्‍याकुलता ..छटपटाहट उसके सीने में
एक हलचल सी मचा देता है
सोते से जाग जाती है वह
जब भी आवाज दो तो वही शब्‍द
तुम्‍हारे पास ही तो हूं ...
मां .....धरती भी है अम्‍बर भी है
नदिया और समन्‍दर भी है
मां कोमल है तो कठोर भी है
मां की आंखों से डरना भी पड़ता है
कभी-कभी उन आंखो से छिपना भी पड़ता है
भूल गये मां की मार ?
भला किसने नहीं खाई होगी
बताए तो जरा
वो हंसाती भी वो रूलाती भी है
थाम के उंगली चलना सिखलाती है
गिरने से पहले बचाती भी है ....
मां घर की नींव बनकर
पूरे परिवार को मन के आंगन में समेटती है ...
बीज बोती है पल-पल खुशियों के
तभी मिलते हैं हमें संस्‍कार ऐसे
मां ....का नाम आता है लब पर तो
मन श्रद्धा के फूलों सा भावुक हो उठता है
अश्रु रूपी जल से उसे सिंचित करता है
मां ....ईश्‍वर की छाया है
ईश्वर का दूसरा नाम
मां का अभिनन्‍दन करता है ....
मां पर जाने क्‍या - क्‍या कह गया ये मन
फिर भी अधूरा है कुछ .....
मां के बिना .... कुछ भी पूरा नहीं ... !!!!

26 टिप्‍पणियां:

  1. jo likho jitnaa likho kam hai
    maa to maa hai
    achhee abhivyakti

    जवाब देंहटाएं
  2. माँ से बढ़कर कोई नहीं .सार्थक लेखन .आभार
    slut walk

    जवाब देंहटाएं
  3. मां का अभिनन्‍दन करता है ....
    मां पर जाने क्‍या - क्‍या कह गया ये मन
    फिर भी अधूरा है कुछ .....
    मां के बिना .... कुछ भी पूरा नहीं ... !!!!भाव परवान यादों में गोता लगवाने वाली अभिव्यक्ति .शुक्रिया .
    Tuesday, August 16, 2011
    उठो नौजवानों सोने के दिन गए ......http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/
    सोमवार, १५ अगस्त २०११
    संविधान जिन्होनें पढ़ लिया है (दूसरी किश्त ).
    http://veerubhai1947.blogspot.com/
    मंगलवार, १६ अगस्त २०११
    त्रि -मूर्ती से तीन सवाल .

    जवाब देंहटाएं
  4. मां के बिना ....
    कुछ भी पूरा नहीं .....

    समझ सकती हूँ...
    क्योंकि कल तक आपके बारे जानती नहीं थी .....

    जवाब देंहटाएं
  5. kitni bhi sadayen de lo sada maa ke naam ki fir bhi kuchh n kuchh adhura hi rahega...aur sirf apke liye nahi ham sab ke liye.

    bahut sunder prastuti.

    जवाब देंहटाएं
  6. मां ...एक सुकून है दिल का
    एक ऐसा साया
    जिसके होने से हम निश्चिंतता की चादर
    तान कर सोते हैं
    बहुत सही व् भावपूर्ण कहा सदा जी आपने आभार

    जवाब देंहटाएं
  7. Bahut badhiya.. gajab ka ehsaas ho raha aapki rachna ko padhkar maa ke ird-gird...

    जवाब देंहटाएं
  8. माँ और ममता एक सतत प्रक्रिया है जिससे सृष्टि चलती है. सुंदर काव्य.

    जवाब देंहटाएं
  9. मां ....का नाम आता है लब पर तो
    मन श्रद्धा के फूलों सा भावुक हो उठता है
    अश्रु रूपी जल से उसे सिंचित करता है
    मां ....ईश्‍वर की छाया है
    ईश्वर का दूसरा नाम


    इस महत्वपूर्ण रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  10. माँ के बारे में किन शब्दों में लिखा जाय समझ नहीं आ रहा, आपका सफल प्रयास सराहनीय है...
    इसे भी देखिए और बताइए कि कैसी रचना है? समझ में कम आये तो शब्दार्थ देख लेना फिर बताना थोड़ी क्लिष्ट हो गयी है।

    एक 'ग़ाफ़िल' से मुलाक़ात याँ पे हो के न हो

    जवाब देंहटाएं
  11. माँ हर जगह हर हाल में साथ होती है .....बहुत सुंदर

    जवाब देंहटाएं
  12. माँ के बारे में जितना भी लिखा जाये कम है.............बहुत सुन्दर लिखा है आपने|

    जवाब देंहटाएं
  13. माँ और उसकी ममता दोनों को ही न तो शब्दों में बंधा जा सकता है न ही कहीं तौला जा सकता है
    लाजवाब प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  14. क्या कहू, जितना कहा जाये उतना कम हैं.

    जवाब देंहटाएं
  15. सच में हर शब्द में माँ नज़र आती है माँ के प्रति प्यार भी नज़र आता है...

    जवाब देंहटाएं
  16. माँ का स्थान कोई नहीं ले सकता है ....

    जवाब देंहटाएं
  17. मां पर जाने क्‍या - क्‍या कह गया ये मन
    फिर भी अधूरा है कुछ .....
    मां के बिना .... कुछ भी पूरा नहीं .

    So true !

    .

    जवाब देंहटाएं
  18. नमस्कार....
    बहुत ही सुन्दर लेख है आपकी बधाई स्वीकार करें
    मैं आपके ब्लाग का फालोवर हूँ क्या आपको नहीं लगता की आपको भी मेरे ब्लाग में आकर अपनी सदस्यता का समावेश करना चाहिए मुझे बहुत प्रसन्नता होगी जब आप मेरे ब्लाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँगे तो आपकी आगमन की आशा में पलकें बिछाए........
    आपका ब्लागर मित्र
    नीलकमल वैष्णव "अनिश"

    इस लिंक के द्वारा आप मेरे ब्लाग तक पहुँच सकते हैं धन्यवाद्

    1- MITRA-MADHUR: ज्ञान की कुंजी ......

    2- BINDAAS_BAATEN: रक्तदान ...... नीलकमल वैष्णव

    3- http://neelkamal5545.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं
  19. "हमारी भूख हमारी प्‍यास का अहसास
    हमसे ज्‍यादा मां को होता है"
    सत्यवचन। बहुत ही सुंदर मार्मिक और मीठी रचना।

    जवाब देंहटाएं
  20. माँ को शब्दों में लिखना संभव नहीं ... पर लिखने से अपने आप को रोकना भी संभव नहीं ... सुन्दर लिखा है बहुत ...

    जवाब देंहटाएं
  21. आपकी पोस्ट आज चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई ,
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच

    जवाब देंहटाएं
  22. sada ji bahut hi behatreen tareeke se maa shabd ki vykhya ki hai aapne ..par kahte hain na ki maa to ek samucha sansaar hai jinke liye kitna bhi likha jaaye vo adhura hai lagega.
    aapne maa ko yatharth ke dhratal par nischit rupse shbdon ke jariye utaara hai ..har maa ko naman
    bahut hi behtreen prastuti
    poonam

    जवाब देंहटाएं