रविवार, 6 सितंबर 2020
निर्मल स्नेह भर अँजुरी में ...
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मन की नदी में तर्पण किया है पापा भावनाओं से, भीगा सा मन लिए ... इस पितृपक्ष फिर बैठी हूँ आकर, भोर से ही छत पर, जहाँ कौए के कांव - कांव ...
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शनिवार, 22 अगस्त 2020
ये स्मृतियाँ आपकी !!!
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स्मृतियाँ जब भी तर्क करती पापा मैं आपको सोचती, और फिर आपकी हथेली में होती मेरी उँगली, जिया हुआ,बेहद सुखद क्षण सजीव हो उठता, या फिर … जब मे...
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मंगलवार, 28 जुलाई 2020
पग धरो दिव्यता !!!
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कर कमल पग धरो दिव्यता आलोकित हुई धरा, कण-कण है शोभित आगमन से आपके मन मुग्ध हुआ जो अधीर था ! …. कामना शुभता की ह्रदय में ...
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रविवार, 19 जुलाई 2020
साधना जानती है वो !!!
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शब्दों को साधना जानती है वो, किस शब्द को कब कहाँ जगह देनी है बख़ूबी पता भी है.. कठोर से कठोर ज़िद्दी से ज़िद्दी शब्द, सब उसके एक इशारे पे नतम...
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मंगलवार, 30 जून 2020
वक़्त बोल रहा है !!!
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सब की बोलती बंद है इन दिनों, वक़्त बोल रहा है बड़ी ही ख़ामोशी से कोई बहस नहीं, ना ही कोई, सुनवाई होती है एक इशारा होता है और पू...
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