रविवार, 26 अक्टूबर 2014
'मैं' रिश्तों का सूत्रधार !!!!
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मैं का संसार अनोखा होता है कभी विस्तृत तो कभी शून्य मैं गुरू जीवन का इसका ज्ञान इसका मंत्र मैं का ही रूप जिसके भाव अने...
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बुधवार, 15 अक्टूबर 2014
तो कभी चाहत में !!!!!
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प्रेम को जब भी देखती हूँ मैं अपेक्षाओं की आँखों में रंग सारे बारी-बारी बिखर जाते हैं कभी प्रेम माँगता बदले में प्रेम तो कभी चा...
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शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2014
एहसासों की खिड़कियाँ ...
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बड़ी तीक्ष्ण होती है स्मृतियों की स्मरण शक्ति समेटकर चलती हैं पूरा लाव-लश्कर अपना कहीं हिचकियों से हिला देती हैं अन्तर्म...
13 टिप्पणियां:
मंगलवार, 23 सितंबर 2014
इन शब्दों को !!!!
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शब्दों की चुभन से कई बार मन बस हैरान रह जाता है ताकते हुये शून्य में सोचता है कैसे इतने पैने हो गये हैं ये आक्रामक हो जाना इ...
21 टिप्पणियां:
बुधवार, 17 सितंबर 2014
कुछ रिश्ते !!!
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कुछ रिश्ते बस प्रेम की छड़ी होते हैं, चोट नहीं लगती इनके पड़ने से कभी अच्छे और बुरे का ज्ञान जरूर हो जाता है ! ... कुछ रिश...
19 टिप्पणियां:
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