मंगलवार, 25 मई 2010
फिसल गया वक्त ....
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मैं किसी की आंख का ख्वाब हूं, किसी की आंख का नूर हूं । भूल गया सब कुछ मैं तो खुद, अपने आप से भी दूर हूं । हस्ती बनने में लगा वक्...
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बुधवार, 7 अप्रैल 2010
क्यों ...?
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उड़ जाती नींद आंखों से क्यों, जब ख्वाब कोई टूट जाता है । गुस्ताखियां याद आती हैं क्यों, कोई जब माफी मांग के जाता है । बदलता ...
14 टिप्पणियां:
गुरुवार, 11 मार्च 2010
तन्हा होने का ...
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उसने हर एक आंसू से धोये मुहब्बत के जख्म तब सारी टीसें दर्द की चीखने लगीं इतना समर्पण तेरा उस प्यार के लिये जो तेरा न हुआ ...
15 टिप्पणियां:
बुधवार, 3 मार्च 2010
तोड़ने से पहले ...
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तुम मेरा ही अंश हो, आओ तुमको बतलाऊं, तुम्हें तुम्हारे बारे में मेरी धड़कनों से तुम्हें हवा मिलने लगी है तुम्हारा वजूद अस्तित...
11 टिप्पणियां:
शनिवार, 20 फ़रवरी 2010
ऐसा क्यों होता है .....?
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(1) घनी पलकों की छाव में सुन्दरता बढ़ जाती नयनों की इन पलकों की छांव का एक बाल टूटकर जब डूब जाता नयनों के प्याले में कितनी...
21 टिप्पणियां:
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