शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2011
मन की बातें ...!!!
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मेरे सवालों के दायरे में जब वो होती है तो उसका मन भी मेरी बातों में उलझने लगता है वह मुझे बहलाकर झट से बाहर हो जाती है मु...
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सोमवार, 24 अक्टूबर 2011
मैं जलाऊं दीप संग दीप ...
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मैं जलाऊं दीप संग दीप तुम उनमें उम्मीद का तेल डालना कुछ ऐसे कि वो देर रात तक जलते रहें मां लक्ष्मी के आगमन तक विश्वास की...
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गुरुवार, 20 अक्टूबर 2011
कोई अवशेष रह न जाए ...
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मैं दूर जाना चाहती हूं, तुम्हारी हर याद से हर याद को मैने बहते जल में प्रवाहित किया आते समय अपने पैरों को धोया अपने उन्हीं हांथो से छूकर ...
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सोमवार, 17 अक्टूबर 2011
संभावनाओं के द्वार ....!!!
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संभावनाओं के द्वार तुम खटखटाओ तो सही मुश्किलें बहुत हैं दूर है मंजिल .... मगर कितनी ? तुम पाने को उन् हें हांथ अपना ब़ढ़ाओ...
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शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2011
रूह ने आवाज दी है ....
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आज रूह ने आवाज दी है बुलन्द हौसलों को वे हौसले जो हार कर भी नहीं हारते थे कभी थककर भी नहीं थकते थे कभी, हां शिथिल जरूर हो जाते थे स्नायुतं...
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